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প্রচ্ছদ

সর্বশেষ খবর :

এম. নজরুল ইসলাম: জনমানুষের আস্থায় আওয়ামী লীগ

এম. নজরুল ইসলাম: সেই ব্রিটিশ আমল থেকে শুরু করে আজ পর্যন্ত এই উপমহাদেশের রাজনৈতিক বিবর্তনের দিকে দৃষ্টি দিলে একটি ধারাবাহিকতা দৃশ্যমান হয়। গতানুগতিক রাজনৈতিক ধারার সঙ্গে প্রগতিশীল গণতান্ত্রিক রাজনৈতিক ধারাও সমানভাবে বহমান এই অঞ্চলে। আবার একইসঙ্গে ধর্মভিত্তিক একটি পশ্চাৎপদ রাজনৈতিক ধারাও এখানে বিকশিত হওয়ার চেষ্টা করেছে। ভারত ভাগ এবং সশস্ত্র যুদ্ধের মধ্য দিয়ে স্বাধীন বাংলাদেশের অভ্যুদয়ের পর বাংলাদেশের রাজনীতিতেও পরিবর্তন এসেছে। বাংলাদেশের রাজনীতির ইতিহাসে যে দলটির অবদান সবচেয়ে বেশি সেই বাংলাদেশ আওয়ামী লীগের বাংলাদেশের সবচেয়ে ঐতিহ্যবাহী ও প্রাচীন রাজনৈতিক দলটির ৭২তম প্রতিষ্ঠাবার্ষিকী বা জš§দিন আজ। প্রতিষ্ঠা ১৯৪৯ সালের ২৩ জুন ঢাকার রোজ গার্ডেনে। শুরুতেই দলটির নাম আওয়ামী লীগ ছিল না। জš§কালে যে দলটির নাম ছিল আওয়ামী মুসলিম লীগ, সেই দলটিই আজকের আওয়ামী লীগ। প্রথম কমিটিতে সভাপতি ছিলেন মওলানা আবদুল হামিদ খান ভাসানী। সাধারণ সম্পাদক ছিলেন টাঙ্গাইলের শামসুল হক। যুগ্ম সম্পাদক ছিলেন সে সময়ের তরুণ নেতা শেখ মুজিবুর রহমান। বঙ্গবন্ধুর অসমাপ্ত আত্মজীবনীতে সে সময়ের কথা উল্লেখ আছে। যখন ঢাকার রোজ গার্ডেনে দলের গোড়াপত্তন হচ্ছে, তরুণ নেতা শেখ মুজিবুর রহমান তখন কারাগারে। অসমাপ্ত আত্মজীবনীতে তিনি লিখেছেন, ‘কর্মী সম্মেলনের জন্য খুব তোড়জোড় চলছিল। আমরা জেলে বসেই সে খবর পাই। ১৫০ নম্বর মোগলটুলীতে অফিস হয়েছে।…আমরা সম্মেলনের ফলাফল সম্বন্ধে খুবই চিন্তায় দিন কাটাচ্ছিলাম। আমার সঙ্গে যোগাযোগ করা হয়েছিল, আমার মত নেয়ার জন্য। আমি খবর দিয়েছিলাম, ‘আর মুসলিম লীগের পিছনে ঘুরে লাভ নেই। এ প্রতিষ্ঠান এখন গণবিচ্ছিন্ন সরকারী প্রতিষ্ঠানে পরিণত হয়েছে। … এরা কোটারি করে ফেলেছে। একে আর জনগণের প্রতিষ্ঠান বলা চলে না। … আমাকে আরও জিজ্ঞাসা করা হয়েছিল, আমি ছাত্র প্রতিষ্ঠান করব, না রাজনৈতিক প্রতিষ্ঠান গঠন করা হলে তাতে যোগদান করব? আমি উত্তর পাঠিয়েছিলাম, ছাত্র রাজনীতি আমি আর করব না, রাজনৈতিক প্রতিষ্ঠানই করব। কারণ বিরোধী দল সৃষ্টি করতে না পারলে এ দেশে একনায়কত্ব চলবে। … সকলেই একমত হয়ে নতুন রাজনৈতিক প্রতিষ্ঠান গঠন করলেন; তার নাম দেওয়া হলো. ‘পূর্ব পাকিস্তান আওয়ামী মুসলীম লীগ। মওলানা আবদুল হামিদ খান ভাসানী সভাপতি, জনাব শামসুল হক সাধারণ সম্পাদক আর আমাকে করা হলো জয়েন্ট সেক্রেটারি। খবরের কাগজে দেখলাম, আমার নামের পাশে লেখা আছে ‘নিরাপত্তা বন্দী’। আমি মনে করেছিলাম, পাকিস্তান হয়ে গেছে। সাম্প্রদায়িক রাজনৈতিক প্রতিষ্ঠানের দরকার নেই। একটা অসাম্প্রদায়িক প্রতিষ্ঠান হবে, যার একটা সুষ্ঠু ম্যানিফেস্টো থাকবে।’

তরুণ শেখ মুজিব যে অসাম্প্রদায়িক রাজনৈতিক প্রতিষ্ঠানের কথা ভেবেছিলেন, তা কার্যকর হতে খুব বেশিদিন সময় লাগেনি। ১৯৪৯ সালে গঠিত পূর্ব পাকিস্তান আওয়ামী মুসলিম লীগ পরবর্তীকালে নাম থেকে মুসলিম শব্দটি বাদ দিয়ে দলের নেতৃত্ব দলকে একটি অসাম্প্রদায়িক দলে রূপান্তর করেন। তখন এটি ছিল একটি সাহসী সিদ্ধান্ত।

আওয়ামী লীগের ৭২ বছরের ইতিহাস দুর্গম পথ চলার ইতিহাস, চরাই-উতরাই পার হওয়ার ইতিহাস। ১৯৫৭ সালে আওয়ামী লীগ সভাপতি মওলানা ভাসানীর নেতৃত্বে টাঙ্গাইলের সন্তোষে অনুষ্ঠিত কাগমারী সম্মেলনকে কেন্দ্র করে আওয়ামী লীগ ভাগ হয়ে যায়। ভাষাসৈনিক, বীর মুক্তিযোদ্ধা ও কলামিস্ট শামসুল আরেফিন খান লিখেছেন, শহীদ সোহরাওয়ার্দী নিখিল পাকিস্তান আওয়ামী লীগের সভাপতির পদ গ্রহণ করলেন। তাঁর প্রিয় সহচর শেখ মুজিবুর রহমান দলের প্রতিষ্ঠাকালীন সাধারণ সম্পাদক শামসুল হকের স্থলাভিষিক্ত হলেন। টাঙ্গাইলের জনপ্রিয় নেতা শামসুল হক হঠাৎ অসুস্থ হয়ে পড়ায় মওলানা ভাসানী সভাপতির গঠনতান্ত্রিক ক্ষমতাবলে দাউদকান্দির সোহরাওয়ার্দী-অনুসারী পাশ্চাত্যপন্থী নেতা খন্দকার মোশতাক আহমদের জ্যেষ্ঠতার দাবি অগ্রাহ্য করে রাজবন্দী শেখ মুজিবুর রহমানকে পূর্ব পাকিস্তান আওয়ামী মুসলিম লীগের সাধারণ সম্পাদক পদে নিযুক্ত করলেন। পাশ্চাত্যপন্থী সেক্যুলার গণতান্ত্রিক নেতা হোসেন শহীদ সোহরাওয়ার্দী সমাজতন্ত্র-অনুসারীদের দলের নেতৃত্বে বরণ করতে মোটেও দ্বিধা বোধ করলেন না। বরং তাদের অবলম্বন করে দলকে অসাম্প্রদায়িক চেতনায় অভিষিক্ত করলেন। অসাম্প্রদায়িক প্রগতিশীল গণতান্ত্রিক দল হিসেবে আওয়ামী মুসলিম লীগ থেকে আওয়ামী লীগের নতুন যাত্রা শুরু হলো। এই পর্যায়ে ফরিদপুরের এ্যাডভোকেট আব্দুস সালাম খানসহ কিছু রক্ষণশীল প্রভাবশালী লোক ‘মুসলিম’ অভিধা ছেঁটে ফেলার প্রতিবাদে দলত্যাগ করলেন। কিন্তু তাতে দলের কোন ক্ষতি হলো না। শহীদ সোহরাওয়ার্দীর তিরোধানের পর শেখ মুজিবুর রহমান গভীর আত্মপ্রত্যয় নিয়ে আওয়ামী লীগের পুনরুজ্জীবন ঘটালেন।

বিশেষক ও গবেষক অধ্যাপক আবদুল মান্নান লিখেছেন, ১৯৬৬ সালের ১৮ মার্চ দলের কাউন্সিল অধিবেশনে বঙ্গবন্ধু বাঙালীর মুক্তির সনদ ছয় দফা ঘোষণা করলে তাঁকে কেন্দ্র করে আওয়ামী লীগে দ্বিতীয়বারের মতো বিভক্তি দেখা যায়। দলের সভাপতি আবদুর রশিদ তর্কবাগীশ আওয়ামী লীগের সঙ্গে সম্পর্ক ছেদ করেন। একই কাউন্সিল অধিবেশনে শেখ মুজিবকে সভাপতি আর তাজউদ্দীন আহমদকে সাধারণ সম্পাদক করে দল পুনর্গঠন করা হয়। আওয়ামী লীগ ঘোষিত ছয় দফা সারাদেশে ব্যাপক জনপ্রিয়তা পায়।

১৯৭০ সালের নির্বাচন শুধু বাঙালীর জন্য একটি টার্নিং পয়েন্ট ছিল না, আওয়ামী লীগের জন্যও একটি ইতিহাস সৃষ্টির সুযোগ ছিল, যা বঙ্গবন্ধুর নেতৃত্বে বাঙালী আর আওয়ামী লীগ অর্জন করেছে। সেই নির্বাচনে বাংলাদেশ আওয়ামী লীগ পাকিস্তানের জাতীয় সংসদে ৩১৩ আসনের মধ্যে ১৬৭ আসন পেয়ে নিরঙ্কুশ সংখ্যাগরিষ্ঠতা অর্জন করেছিল।

১৯৭১ সালের মুক্তিযুদ্ধ শেষে পাকিস্তানের কারাগার থেকে ১৯৭২ সালের ৮ জানুয়ারি মুক্ত বঙ্গবন্ধু শেখ মুজিব ১০ জানুয়ারি দেশে ফিরে সরকার গঠন করে যুদ্ধবিধ্বস্ত দেশ পুনর্গঠনের দুরূহ কাজটি হাতে তুলে নেন এবং সাড়ে তিন বছরের মাথায় দেশকে নিজের পায়ের ওপর দাঁড় করিয়ে দেন। এটি বললে অত্যুক্তি হবে না, বাংলাদেশে গত চার দশকে যত সরকার দেশ শাসন করেছে, বঙ্গবন্ধুর সেই সাড়ে তিন বছরের সরকারের মতো এত কঠিন সব চ্যালেঞ্জ অন্য কোন সরকারকে মোকাবেলা করতে হয়নি। ১৯৭৫ সালের ১৫ আগস্টের কালরাতে বঙ্গবন্ধুকে দেশের শত্রæরা সপরিবারে হত্যা করলে আওয়ামী লীগ আবার অস্তিত্বের সঙ্কটে পড়ে। ১৯৮১ সালে আওয়ামী লীগের এক বিশেষ কাউন্সিল অধিবেশনে প্রবাসে নির্বাসন জীবনযাপনকারী শেখ হাসিনাকে সর্বসম্মতভাবে দলের সভাপতি নির্বাচিত করা হয়। সেই বছর ১৭ মে শেখ হাসিনা দেশের এক ক্রান্তিকালে দেশে ফেরেন। তাঁর নেতৃত্বেই দলে নতুন করে ঐক্য সুসংহত হয়। এর পর থেকে ৪০ বছর ধরে তাঁর নেতৃত্বেই দলটি গণতন্ত্র ও মানুষের ভোট-ভাতের অধিকার প্রতিষ্ঠার দীর্ঘ আন্দোলন-সংগ্রামেও সফলতা দেখিয়ে আসছে। নব্বইয়ের গণঅভ্যুত্থানের মাধ্যমে স্বৈরাচার এরশাদবিরোধী আন্দোলনে বিজয়লাভের মাধ্যমে গণতন্ত্র পুনঃপ্রতিষ্ঠার পেছনে দলটির মুখ্য অবদান ছিল। ১৯৯৬ সালে দীর্ঘ ২১ বছর পর সরকার গঠন করে আওয়ামী লীগ। প্রথমবারের মতো প্রধানমন্ত্রীর আসন অলঙ্কৃত করেন বঙ্গবন্ধু কন্যা শেখ হাসিনা।

২০০৮ সালের ২৯ ডিসেম্বর নির্বাচনে শেখ হাসিনার নেতৃত্বে আওয়ামী লীগ ও মহাজোট ঐতিহাসিক বিজয় অর্জন করে। ২০০৯ সালের ৬ জানুয়ারি শেখ হাসিনাকে প্রধানমন্ত্রী করে আওয়ামী লীগের নেতৃত্বাধীন মহাজোট সরকার গঠন করে। দশম ও একাদশ জাতীয় সংসদ নির্বাচনেও নিরঙ্কুশ বিজয় অর্জনের মাধ্যমে টানা তৃতীয় মেয়াদে আওয়ামী লীগ দেশ পরিচালনা করছে। চতুর্থবারের মতো প্রধানমন্ত্রী হয়েছেন শেখ হাসিনা।

মুক্তিযুদ্ধে বিজয় শুধু নয়, জাতীয় ও আন্তর্জাতিক পর্যায়ে বাংলাদেশের যত ইতিবাচক অর্জন, সবই হয়েছে আওয়ামী লীগের শাসনামলে। এখন তো এটা প্রমাণিত যে, আওয়ামী লীগ ক্ষমতায় থাকা মানেই দেশের মানুষ নিরাপদ বোধ করে। ২০০৯ সালে সরকার গঠনের পর থেকে গত ১২ বছরে যে উন্নয়ন হয়েছে, তা অতীতে আর কখনও হয়নি। দেশের মানুষের ভাগ্য পরিবর্তনে আওয়ামী লীগ রাজনৈতিকভাবে অঙ্গীকারবদ্ধ বলেই দলটি আজ অনিবার্য। বঙ্গবন্ধু কন্যার সফল ও কার্যকর নেতৃত্বে দলটি আজ মানুষের আস্থার গভীরে স্থান করে নিতে পেরেছে।

লেখক : সর্ব ইউরোপিয়ান আওয়ামী লীগের সভাপতি এবং অস্ট্রিয়া প্রবাসী মানবাধিকারকর্মী ও সাংবাদিক

 

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