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প্রচ্ছদ

সর্বশেষ খবর :

৮০০ কোটি টাকার বোরো ধান উৎপাদন তিস্তার সেচে

নিউজ ডেস্ক: দেশের সর্ববৃহৎ সেচ প্রকল্প তিস্তা ব্যারাজের নীলফামারীর ডালিয়া হতে রংপুরের বদরগঞ্জ উপজেলার দূরত্ব ৭৯ কিলোমিটার। দিনাজপুরের চিরিবন্দরের দূরত্ব ৬৫ কিলোমিটার। ক্যানেলের মাধ্যমে তিস্তার সেচে ওই সকল এলাকার কৃষকরা এবার বোরো ধানের বাম্পার ফলন ঘরে তুলেছে। শুধু বদরগঞ্জ বা চিরিরবন্দর নয়, রংপুরের গঙ্গাচড়া, তারাগঞ্জ, দিনাজপুরের পার্বতীপুর, নীলফামারী সদর, সৈয়দপুর, জলঢাকা, কিশোরীগঞ্জ ও ডিমলা উপজেলার কৃষকরা ৫৩ হাজার হেক্টরে তিস্তার সেচে উৎপাদিত বোরো ধান ঘরে তোলেন। বদরগঞ্জের কৃষক আব্দুল লতিফ জানালেন, মহামারী করোনাকালে হিটশকে তিস্তা সেচের বাইরে কিছুটা ফসলহানি হলেও এবার বোরো ধানের বাম্পার ফলন হয়েছে। তিস্তার সেচে তিনি ৮ বিঘা জমির বোরো ধান ঘরে তুলেছেন ২১৬ মণ। প্রতি বিঘায় ধান পেয়েছেন ২৭ মণ করে। যা গতবারের আমন মৌসুমের চেয়ে বিঘা প্রতি ৭ মণ বেশি। চিরিরবন্দরের কৃষক মোতালেব হোসেন বললেন ৫ বিঘা জমিতে ধান পেয়েছেন ১২৫ মণ। গড়ে বিঘাতে এসেছে ২৫ মণ করে।

নীলফামারীর ডিমলার খালিশাচাঁপানী এলাকার কৃষক আমিনুর রহমান বললেন, তিস্তার সেচে তিনি ২০ বিঘা জমিতে বোরো ধান আবাদ করে ধান তুলেছেন ৫৬০ মণ। বিঘাপ্রতি ধান পেয়েছেন ২৮ মণ করে। কৃষকরা বলছেন, তিস্তার সেচের পানিতে উচ্চ ফলনশীল জাত আবাদ বেশি হওয়ার কারণে এবার ফলন বেশি পেয়েছে। এলাকাভেদে বোরো ধানের উৎপাদন একটু আধটু কম বেশি হলেও তিস্তা সেচ কমান্ড এলাকার কৃষকরা বলছেন, বোরো আবাদে তারা এবার ছক্কা মেরেছেন। আর তাতে সরকারের খাদ্য মজুদ বৃদ্ধির সুযোগ সৃষ্টি করেছে।

সূত্রমতে, গত আমন মৌসুমে রংপুর বিভাগে ন্যায্যমূল্যে সরকারী ধান-চাল সংগ্রহের অভিযান পুরোদমে ব্যর্থ হয়। ওই সময় সরকারের পক্ষ থেকে ধানের ক্রয়মূল্য ছিল কেজি প্রতি ২৬ টাকা আর চালের মূল্য ছিল ৩৬ টাকা। এবার সরকারীভাবে ধানের ক্রয়মূল্য নির্ধারণ করা হয়েছে ২৭ টাকা এবং চাল ৪০ টাকা। গত ৪ মে থেকে চলতি বোরো মৌসুমে সংগ্রহ অভিযান শুরু হয়েছে। তবে এবার লক্ষ্যমাত্রা পূরণ হবে বলে আশা করছে খাদ্য বিভাগ। এবারে সরকার নির্ধারিত মূল্য বাজার মূল্যের চেয়ে বেশি হওয়ায় সংগ্রহের লক্ষ্যমাত্রা এগিয়ে যাচ্ছে।

উত্তরাঞ্চলের কৃষকদের বাঁচিয়ে রেখেছে তিস্তা তার জলদুগ্ধে। কখনও প্রত্যক্ষ, কখনও পরোক্ষ, তিস্তা নদী হলো উত্তরের জীবনরেখা। তিস্তার কাছে এই অঞ্চলের মানুষের ঋণ চিরদিনের। দেশের খাদ্যের চাহিদা মেটাতে মুখ্য ভ‚মিকা পালন করে উত্তরবঙ্গ তথা রংপুর অঞ্চল। খাদ্য শস্যের ভাÐার রংপুর অঞ্চলে প্রতি বছরই বোরো মৌসুম এলে প্রাকৃতিক উপায়ে পানির ব্যবস্থা না থাকায় চাষাবাদে ফসলি জমিতে সেচের চাহিদা থাকে। সেই তিস্তার পানি দিয়ে দেশের সর্ববৃহৎ সেচ প্রকল্প তিস্তা ব্যারাজ সেচ কার্যক্রম চালিয়ে ফসল উৎপাদনে মাইলফলক স্থাপন করে যাচ্ছে।

তিস্তা ব্যারাজ ডালিয়া ডিভিশনের নির্বাহী প্রকৌশলী আব্দুল্লাহ আল মামুন জানান, বিদ্যুতচালিত সেচযন্ত্রে এক হেক্টর জমিতে ধান আবাদে সেচ খরচ হয় ১০ হাজার ৫০০ টাকা। ডিজেলচালিত সেচযন্ত্রে খরচ হয় ১৪ হাজার। সেখানে তিস্তা ব্যারাজের কমান্ড এলাকার সেচে এক হেক্টরে কৃষকের খরচ পড়ে মাত্র ১ হাজার ২০০ টাকা। ধানের উৎপাদন প্রসঙ্গে তিনি বলেন, বিদ্যুত ও ডিজেলচালিত সেচে এক হেক্টরে ধান উৎপাদন হবে ৫ দশমিক ৫ টন। তিস্তার সেচে প্রতি হেক্টরে উৎপাদন হচ্ছে ৬ টন। তিনি আরও জানান, এবার তিস্তার সেচে ৫৩ হাজার হেক্টর জমিতে বোরো ধানের গড় ফলন হয়েছে ৭ লাখ ৪১ হাজার মেট্রিক টন ধান। যা টাকার অঙ্কে সরকারী হিসাবে প্রায় ৮০০ কোটি টাকার ধান কৃষক ঘরে তুলেছেন।

তিস্তা ব্যারাজ ডালিয়ার সম্প্রসারণ কর্মকর্তা রাফিউল বারী বলেন, মহামারী করোনা সংক্রমণ রোধে লকডাউন থাকলেও কৃষকদের সুবিধার জন্য আমরা ঝুঁকি নিয়ে মাঠে কৃষকদের পাশে ছিলাম। কৃষক যাতে সেচ সুবিধা থেকে বঞ্চিত না হয়, সেদিকে যথেষ্ট খেয়াল রাখতে হয়েছে। সেচ সুবিধা পেতে ১২ উপজেলার সুবিধাভোগী কৃষকের মধ্যে ২৭০টি পানি ব্যবস্থাপনা দল তৈরি করা হয়েছিল। তারা মূলত কৃষকের সুবিধার্থে পানি বণ্টনের কাজটি করে। এই প্রক্রিয়ায় পানি সমবণ্টন ও সেচ দেয়া সহজ হয়। যার ফলে কৃষকরা বোরোর বাম্পার ফলনে সক্ষম হয়েছে। তিনি আরও বলেন, চলতি বছরের ২৫ জানুয়ারি থেকে খরিপ-১ মৌসুমে কৃষকের জমিতে সেচ কার্যক্রম শুরু করা হয়েছিল।

ডিমলার নাউতরা শালহাটি গ্রামের কৃষক বেলাল হোসেন জানান, গত কয়েক বছরের তুলনায় তিস্তা সেচ প্রকল্পের পানি এবার চাহিদামতো পাওয়া যায়। ফলে বোরো ধানের বা¤পার ফলন হয়েছে।

এদিকে এক পরিসংখ্যানে দেখা যায়, রংপুর বিভাগের আট জেলায় ফসলি জমি রয়েছে ১২ লাখ ৯৭ হাজার ৯৬৪ হেক্টর। এসব আবাদী জমির মধ্যে চলতি বছর বোরো ধান চাষের লক্ষ্যমাত্রা ধরা হয়েছিল ৯ লাখ ৫৪ হাজার হেক্টর জমিতে। চাষ করা হয়েছে ৯ লাখ ৫৩ হাজার ৫শ’ হেক্টর জমিতে। আবহাওয়া অনুক‚লে থাকায় বিভাগের সর্বত্রই ধান ভাল হয়েছে। কৃষি বিভাগ জানিয়েছে, বিভাগের বিভিন্ন জেলায় বোরো ধানের প্রায় ২০টি জাতের ধান চাষ করা হয়েছে। এরমধ্যে উফশী জাতের ধান বেশি ছিল।

এদিকে পানি উন্নয়ন বোর্ডের সূত্র মতে, তিস্তা নদী বেষ্টিত রংপুর অঞ্চলের রংপুর, দিনাজপুর ও নীলফামারী জেলার কিছু কিছু এলাকায় বছরে আমন ধান ছাড়া আর কোন ফসল হতো না। তিস্তা ব্যারাজ নির্মাণের পর পাউবো ক্যানেল স্থাপনের মাধ্যমে শুষ্ক মৌসুমে তিস্তা নদী থেকে পানি সরবরাহের মাধ্যমে এসব এলাকায় বোরো ধান চাষের পরিকল্পনা নিয়েছিল। তবে ভারত তিস্তার উজানে গজলডোবা বাঁধ নির্মাণ করে পানির প্রবাহ বাধা দেয়ায় সে পরিকল্পনা কাজে আসে না। পানির অভাবেই এসব এলাকায় বোরো ধান চাষ করতে পারছিলেন না কৃষকরা। কিন্তু এ বছর শুকনো মৌসুমে নদীতে পানি থাকায় তিস্তা ব্যারাজের মাধ্যমে পানি পায় ঐসব এলাকার কৃষকরা। ফলে সেচ কমান্ডিং এরিয়ার মধ্যে নীলফামারীর জলঢাকা, ডিমলা, কিশোরীগঞ্জ, নীলফামারী সদর, সৈয়দপুর, রংপুরের তারাগঞ্জ, গঙ্গাচড়া, বদরগঞ্জ, দিনাজপুরের চিরিরবন্দর, পার্বতীপুর উপজেলায় ৫৩ হাজার হেক্টর জমি সেচ পায়।

রংপুর কৃষি বিভাগ সূত্রে জানা যায়, এবার রংপুর কৃষি অঞ্চলে পাঁচ জেলায় বোরো আবাদের লক্ষ্যমাত্রা ছিল পাঁচ লাখ ২ হাজার ৫২৯ হেক্টর জমিতে। এর মধ্যে নীলফামারীতে ৮২ হাজার ১১০ হেক্টর, রংপুরে ১ লাখ ৩৩ হাজার ৪০ হেক্টর, গাইবান্ধায় ১ লাখ ৯ হাজার ৬১২ হেক্টর, কুড়িগ্রামে ১ লাখ ১০ হাজার ৫০২ হেক্টর ও লালমনিরহাটে ৫০ হাজার ৮৫০ হেক্টর জমিতে। যার গড় ফলনে চালের উৎপাদন হয়েছে ২০ লাখ ৯৭ হাজার ২৩৪ মেট্রিক টন।

পানি উন্নয়ন বোর্ডের প্রধান প্রকৌশলী (উত্তরাঞ্চল) জ্যোতি প্রসাদ ঘোষ বলেন, তিস্তা সেচ প্রকল্প উত্তরাঞ্চলের কৃষি ক্ষেত্রে বৈপ্লবিক পরিবর্তন সাধন করেছে। প্রাকৃতিক দুর্যোগ হবার পরেও তিস্তা ব্যারেজ সেচ প্রকল্পের কমান্ড এলাকাসহ রংপুর কৃষি অঞ্চলে এবার বোরো ধানের বাম্পার ফলন হয়েছে। তিনি বলেন এবার বোরো মৌসুমে তিস্তা সেচ ক্যানেলে মাধ্যমে ৫৩ হাজার হেক্টর জমিতে সেচ প্রদান করা হয়েছিল। এর আগের বছরে বোরো ধান উৎপাদন হয়েছিল প্রায় ১৩৫ কোটি টাকার। এবার তিস্তার সেচ ক্যানেলে পানিতে সরকারী হিসেবে ৮০০ কোটির বেশি টাকার ধান উৎপাদন করেছে কৃষকরা। যা কৃষি অর্থনীতিতে বিশেষ ভ‚মিকা রাখবে। তিনি আরও জানান, এবার তিস্তা সেচ প্রকল্পের কমান্ড এলাকার এক লাখ ১৬ হাজার হেক্টর জমির তৃণমূল পর্যায়ে সেচের পানি পৌঁছে দিতে ৭৫০ কিলোমিটার দীর্ঘ সেকেন্ডারি আর টারসিয়ারি সেচ ক্যানেল নির্মাণে একটি বিশেষ প্রকল্প হাতে নেয়া হয়েছে। এতে ব্যয় ধরা হয়েছে ১ হাজার ৪৭৫ কোটি টাকা। প্রকল্পটি একনেকে পাস হয়েছে। সেকেন্ডারি সেচ ক্যানেলগুলোতে করা হবে সিসি লাইনিং আর টারসিয়ারি ক্যানেলগুলোতে দেয়া হবে আরসিসি ঢালাই। এতে পানির অপচয় ছাড়াই খুব দ্রæত সেচের পানি পৌঁছে যাবে জমিতে। ফসল আবাদ হবে আরও দ্বিগুণ।

সূত্র : জনকণ্ঠ

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