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প্রচ্ছদ

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মোহাম্মদ এ আরাফাত: করোনা টিকা সংগ্রহ ও প্রদানে সরকারের বিচক্ষণতা

মোহাম্মদ এ আরাফাত: বাংলাদেশ সরকার ভ্যাকসিনেশন কার্যক্রম পরিচালনায় অনেক বিচক্ষণতার পরিচয় দিয়েছে। টিকা কার্যক্রম শুরুর আগেই সরকার অগ্রাধিকার ভিত্তিতে ভ্যাকসিন দেবার ঘোষণা দেয়। ফলে ফেব্রুয়ারি মাসে গণটিকা কার্যক্রমের শুরুতেই সেই অগ্রাধিকার পাওয়া দশ ক্যাটাগরির মানুষজন সবার আগে টিকা নেন। মূলত করোনাযোদ্ধা হিসেবে যারা ফ্রন্টলাইনার ছিলেন তাদেরই আগে এই টিকা কার্যক্রমের আওতায় আনা হয়। ২০২১ সালের শুরুতেই ফেব্রুয়ারি-মার্চ-এপ্রিলে প্রায় এক কোটি ডোজ টিকা না পেলে করোনার দ্বিতীয় ঢেউ ধ্বংসাত্মক হতো আমাদের জন্য।

দফায় দফায় পরিবেশ পরিস্থিতি বিবেচনায় এনে সরকারের তরফ থেকে করণীয় সম্পর্কে ঘোষণা এলেও মানুষ অপেক্ষায় ছিল করোনা ভ্যাকসিনের। মূলত গোটা বিশ্ব তখন এই মহামারি থেকে বাঁচতে করোনা ভ্যাকসিনের জন্য তীর্থের কাকের মতো অপেক্ষায় ছিল। অবশেষে সেই অপেক্ষার প্রহর শেষ হয় এবং টিকা আবিষ্কারের সুসংবাদ আসে। বাংলাদেশ উন্নত রাষ্ট্র না হয়েও বিশ্বের উন্নত প্রভাবশালী রাষ্ট্রসমূহের সঙ্গে সমানতালে প্রতিযোগিতা করে ‘ভ্যাকসিন কূটনীতি’তে জয়ী হয়। গত বছর নভেম্বরে বাংলাদেশের বেক্সিমকো ফার্মা অগ্রিম ৮ মিলিয়ন ডলার বিনিয়োগ করে সেরাম ইনস্টিটিউটের সঙ্গে বাংলাদেশে টিকা আমদানি করার এজেন্সি নেয় এবং চুক্তি সম্পাদন করে।

এর ফলে বাংলাদেশ সরকারের জন্যও সেরামের কাছ থেকে টিকা আমদানি করার রাস্তা খুলে যায়। বাংলাদেশ সরকার তড়িৎ গতিতে আমাদের স্বাস্থ্য বিভাগকে সরবরাহ করার জন্য সেরাম ইনস্টিটিউট থেকে তিন কোটি ডোজ টিকা কেনার চুক্তি সম্পাদন করে। ফলে অক্সফোর্ড-অ্যাস্ট্রাজেনেকার টিকা সরবরাহের সঙ্গে সঙ্গেই শুরুর দিকে এই টিকা পায় বাংলাদেশ এবং বিশ্বের ৫৪তম রাষ্ট্র হিসেবে শুরু করে ভ্যাকসিনেশন কার্যক্রম। এখন পর্যন্ত ভারত থেকে উপহার হিসেবে পাওয়া ৩২ লাখ ডোজসহ প্রায় এক কোটি টিকা সেরাম ইন্সিটিটিউট থেকে বাংলাদেশে এসেছে। বাংলাদেশ সরকার এই ভ্যাকসিনেশন কার্যক্রম পরিচালনায় অনেক বিচক্ষণতার পরিচয় দিয়েছে। টিকা কার্যক্রম শুরুর আগেই সরকার অগ্রাধিকার ভিত্তিতে ভ্যাকসিন দেবার ঘোষণা দেয়। ফলে ফেব্রুয়ারি মাসে গণটিকা কার্যক্রমের শুরুতেই সেই অগ্রাধিকার পাওয়া দশ ক্যাটাগরির মানুষজন সবার আগে টিকা নেন। মূলত করোনাযোদ্ধা হিসেবে যারা ফ্রন্টলাইনার ছিলেন তাদেরই আগে এই টিকা কার্যক্রমের আওতায় আনা হয়।

এর মাঝে ছিলেন তিন লাখ সরকারি স্বাস্থ্যকর্মী, সাত লাখ বেসরকারি স্বাস্থ্যকর্মী, দেড় লাখ এনজিও স্বাস্থ্যকর্মী, দু’লাখের ওপর পুলিশ বাহিনীর সদস্য। জেলা প্রশাসক, উপজেলা নির্বাহী অফিসারসহ বিভিন্ন মন্ত্রণালয়ের পাঁচ হাজার। সেনাবাহিনীর জন্য বরাদ্দ ছিল তিন লাখ। সংসদ সদস্যসহ জনপ্রতিনিধিদের জন্য ৭০ হাজার, গণমাধ্যমকর্মীদের জন্য ৫০ হাজার। এছাড়াও দুই লাখ দশ হাজার মুক্তিযোদ্ধাদের জন্যও বরাদ্দ ছিল এই টিকা। আবার বয়োজ্যেষ্ঠ জনগোষ্ঠী ও দীর্ঘমেয়াদি রোগে যারা ভুগছেন তাদের জন্যও বরাদ্দ ছিল এই টিকা, কেননা বয়স্কদের করোনায় মৃত্যুঝুঁকি একটু বেশি।
টিকা কার্যক্রমের শুরুতেই সরকার ফ্রন্টলাইনারদের গুরুত্ব দিয়েছে, কারণ করোনাকালীন স্বাস্থ্যসেবা দেওয়ার ক্ষেত্রে স্বাস্থ্যকর্মীরা যে ভূমিকা পালন করেছেন তা এক কথায় অসামান্য। করোনা মহামারির শুরুতে এমন এক ভীতিকর পরিস্থিতি সৃষ্টি হয়েছিল যে, পরিবারের লোকেরাই আক্রান্ত রোগীর পাশে থাকেননি। গণমাধ্যমে এমন সংবাদও কিন্তু আমরা দেখেছি যে, বাবাকে ফেলে সন্তানেরা চলে যাচ্ছে, স্ত্রী চলে যাচ্ছে স্বামীকে ছেড়ে। কিন্তু সেই করোনা রোগীর পাশে পরিবার না থাকলেও থেকেছেন স্বাস্থ্যকর্মীরা। একজন করোনা রোগীকে তার বাসা থেকে আনা, হাসপাতালে ভর্তি, তার খোঁজ-খবর রাখা, খাবার দেয়া থেকে শুরু করে সার্বিক কাজ তারা করেছেন। তাই টিকা কার্যক্রমের ক্ষেত্রে তাদের অগ্রাধিকার না দিলে এখন করোনার দ্বিতীয় ঢেউ মোকাবেলায় স্বাস্থ্যকর্মীরা কোনোভাবেই সেবাকাজে নিয়োজিত থাকতে পারতেন না। অগ্রাধিকার ভিত্তিতে টিকা দেবার কারণেই আজকে আমরা স্বাস্থ্যসেবা পাচ্ছি।

অপরদিকে পুলিশ, সেনাবাহিনী ও প্রশাসনিক ব্যক্তিবর্গকে টিকাদানের অগ্রাধিকারে আনাটা অনেক গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা রেখেছে। কারণ স্বাস্থ্যকর্মীদের পরেই ফ্রন্টলাইনার হিসেবে এদের নাম আসবে। করোনাকালীন আইন-শৃঙ্খলা রক্ষার জন্য নিয়মিত যেমন তাদের রাস্তায় থাকতে হয়েছে তেমনি লকডাউন প্রদত্ত এলাকায় খাবার সরবরাহ থেকে শুরু করে সার্বিক খোঁজখবর নেয়ার দায়িত্বও তাদের ওপরেই ছিল। এছাড়াও যে গণমাধ্যমকর্মীরা সর্বদা আমাদের সংবাদ দিয়ে গেছেন তাদের অগ্রাধিকার তালিকায় এনে দ্রুত টিকাবলয়ে আনা সরকারের আরেকটি বিচক্ষণ ও বুদ্ধিদীপ্ত সিদ্ধান্ত ছিল।
আমাদের বীর মুক্তিযোদ্ধাদের বর্তমান সরকার যে আলাদা সম্মান ও গুরুত্ব দেয় তার একটি ধারাবাহিক প্রক্রিয়ার উদাহরণ হলো এই টিকাদান কর্মসূচিতে মুক্তিযোদ্ধাদের অগ্রাধিকার দেয়া। করোনা সংক্রমণের শুরুতে আমরা দেখেছি ফ্রন্টলাইনার বিশেষ করে স্বাস্থ্যকর্মীরা অধিক হারে আক্রান্ত হয়েছিল এবং মৃত্যুহারও ছিল অত্যধিক পর্যায়ের। আর তাই সরকার টিকাদান কার্যক্রমের শুরুতে ফ্রন্টলাইনারদের গুরুত্ব দিয়েছে। ফলে করোনার যে দ্বিতীয় ঢেউ বর্তমানে এসেছে সেখানে কিন্তু এই ফ্রন্টলাইনার আক্রান্ত কম হচ্ছে বা আক্রান্ত হলেও গুরুতর অসুস্থ হচ্ছেন না কারণ টিকা নেওয়ার ফলে তাদের ইমিউনিটি বেড়েছে এবং তারা কাজ করতে পারছে।

বর্তমানে করোনা আক্রান্তের সংখ্যা বাড়লেও স্বাস্থ্যকর্মী বা ফ্রন্টলাইনারদের অভাব বোধ করছে না সরকার। চিন্তা করে দেখুন তো স্বাস্থ্যকর্মীরা নিজেরাই যদি টিকাবলয়ে না থাকত এবং একের পর এক আক্রান্ত হয়ে বিছানাগত হতো তাহলে দ্বিতীয় ঢেউ আমরা কীভাবে মোকাবিলা করতাম? সরাকার যদি ২০২১ সালের শুরুতেই অন্যান্য দেশ যেখানে ব্যর্থ হয়েছিল তখন টিকা সংগ্রহ করতে না পারত এবং বিচক্ষণতার সঙ্গে টিকাদান কর্মসূচিতে অগ্রাধিকারের ভিত্তিতে স্বাস্থ্যকর্মীদের টিকাবলয়ে না আনত তাহলে এখন ভয়াবহ সমস্যায় পড়তে হতো সরকারকে সর্বোপরি এই দেশকে, দেশের মানুষকে।

ভ্যাকসিন নিয়ে মার্চের শুরুতে আচমকাই এক সমস্যায় পড়ে যায় বাংলাদেশ। সেরাম ইনস্টিটিউট থেকে যে নির্ধারিত তিনকোটি ডোজ টিকা আসার কথা সেই প্রতিশ্রুত টিকার এককোটি ডোজের মতো আসলেও বাকি দুইকোটি ডোজ আসতে একটু বিলম্ব হবে বলে জানায় সেরাম। ভারত সরকার এই সিদ্ধান্ত শুধু বাংলাদেশের ক্ষেত্রে নেয়নি, সম্প্রতি নিজদেশের বাইরে অন্যান্য দেশে আপাতত করোনা টিকার সরবরাহ বন্ধের সিদ্ধান্ত নিয়েছে তারা। কারণ ভারতে এখন ব্যাপকহারে করোনা সংক্রমণ বেড়েছে। অক্সিজেনের অভাবে লাখ লাখ মানুষ মারা যাচ্ছে। শত শত লাশ গঙ্গাতীরে, হাজারো মানুষের লাইন শ্মশানে। এমন ভীতিকর ভারতের চিত্র গণমাধ্যমের বদৌলতে আমরা দেখতে পাচ্ছি।

ইতোমধ্যে বিশ্বের প্রায় ৪০টি দেশ ভারতকে সহায়তার হাত বাড়িয়ে দিয়েছে। আর সে কারণেই ভারত এখন এই লাশের মিছিল ঠেকাতে আগে নিজেদের ভ্যাকসিনেশন কার্যক্রমকে এগিয়ে নিতে চাইছে। তারা নিজেদের চাহিদা এখন আগে মিটাতে চাইছে। তাছাড়া সেরাম ইনস্টিটিউট কাঁচামালের জন্য যুক্তরাষ্ট্রের ওপর নির্ভরশীল। টিকার কাঁচামাল আমদানির ক্ষেত্রে যুক্তরাষ্ট্র সরকারের নিষেধাজ্ঞার কারণে ভারত চাহিদা অনুযায়ী টিকা উৎপাদন করতে পারছে না। ফলে চুক্তি অনুযায়ী টিকা রপ্তানির মধ্যে ভারসাম্য রক্ষা কঠিন হয়ে দাঁড়িয়েছে। এমন অবস্থায় বাংলাদেশ দ্রুতই নিজেদের বিকল্প ব্যবস্থার দিকে হাত বাড়িয়েছে। বিকল্প ব্যবস্থা হিসেবে মার্কিন যুক্তরাষ্ট্র, রাশিয়া, চীন, জাপানের সঙ্গে টিকা নিয়ে আলোচনা চালিয়েছে এবং সফলভাবে অল্পসময়ের মাঝেই এখন টিকা পাচ্ছে বাংলাদেশ। ইতোমধ্যে দুই ধাপে চীনের উপহারের ১১ লাখ টিকা বাংলাদেশ পেয়েছে।

আবার কোভ্যাক্সের মাধ্যমে গত ৩ জুলাই মার্কিন যুক্তরাষ্ট্র থেকে মডার্নার ২৫ লাখ ডোজ টিকা এবং চীনের সিনোফার্মার আরও ২০ লাখ ডোজ টিকা বাংলাদেশে এসেছে। এদিকে আবার জাপান থেকে অক্সফোর্ড-অ্যাস্ট্রাজেনেকার প্রায় ২৫ লাখ ডোজ টিকা কোভ্যাক্সের মাধ্যমেও পেতে যাচ্ছে বাংলাদেশ। রাশিয়ার ‘স্পুটনিক ভি’ টিকার উৎপাদন বাংলাদেশে করার চিন্তাভাবনাও করছে দুদেশ। অর্থাৎ টিকা নিয়ে সাময়িক যে সমস্যায় পড়েছিল বাংলাদেশ তা কেটে গিয়ে এখন আরও অধিক বেগে টিকা কার্যক্রম শুরু করেছে সরকার।

হার্ড ইমিউনিটি অর্জনের লক্ষ্যে দেশের শতকরা ৮০ ভাগ মানুষকে এই ভ্যাকসিনেশনের আওতায় আনতে হবে। অন্যথায় করোনা মোকাবেলায় সফলতা অর্জন করাটা কঠিন। আর সে লক্ষ্যেই সরকার কাজ করছে। ঈষৎ সংক্ষেপিত।
লেখক: চেয়ারম্যান, সুচিন্তা ফাউন্ডেশন

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