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প্রচ্ছদ

সর্বশেষ খবর :

সুমাইয়া সেতু: আমার দেখা বিপ্লবী ভেনেজুয়েলা

সুমাইয়া সেতু: পৃথিবীর যেই দেশগুলো নানাবিধ কারণে আলোচিত তার মধ্যে ভেনেজুয়েলা অন্যতম। ল্যাটিন আমেরিকার এই দেশটির নাম শোনেনি এরকম মানুষ কমই আছে। ভেনেজুয়েলা অন্যতম ধনী দেশ হিসেবেই পরিচিত ছিলো তার তেল সম্পদের জন্যে। যদিও এই সম্পদই তার কাল হয়েছে পরবর্তী সময়ে। সমাজতান্ত্রিক দল দেশটির ক্ষমতায় থাকায় এই দেশটি সম্পর্কে অনেক উৎসাহ ছিলো আমার। কিন্তু সেই উৎসাহ বাস্তবে পরিণতি পাবে তা সত্যি ভাবিনি। বাইসেন্টিনিয়াল কংগ্রেসে অংশগ্রহণের সুযোগ পাওয়া আমার জীবনের রাজনৈতিক অভিজ্ঞতার অনেক বড় একটি অংশ জুড়ে থাকবে। জীবনের প্রথম বিদেশ ভ্রমণের অভিজ্ঞতা তাও আবার ভেনেজুয়েলায় সারা বিশ্বের ১৮০০ জন প্রতিনিধির মাঝে।

কংগ্রেসে সবার সামনে দাঁড়িয়ে বাংলাদেশের পতাকা ও ছাত্র ইউনিয়নের পতাকা প্রদর্শন করার অভিজ্ঞতা ভাষায় বর্ণনা করার মতো না। স্প্যানিশ উপনিবেশবাদের বিরুদ্ধে কারাবোবো যুদ্ধের দ্বি-শতবার্ষিকী উপলক্ষে এই কংগ্রেসের আয়োজন করা হয়েছিলো। এই কংগ্রেসকে স্বাধীনতা, ঐক্য, সাম্য এবং মানুষের প্রতি মানুষের সংহতির কংগ্রেস হিসেবে উল্লেখ করেছিলেন ভেনেজুয়েলার প্রেসিডেন্ট নিকোলাস মাদুরো। সেই ডাকে সাড়া দিয়ে করোনা পরিস্থিতির মধ্যেও বিভিন্ন প্রতিনিধিরা উপস্থিত হয়েছিলেন। এই আয়োজনকে ল্যাটিন আমেরিকার বিপ্লবী নেতা সাইমন বলিভারের নামে উৎসর্গ করা হয়। চার দিনব্যাপী বিভিন্ন আয়োজনের মধ্য দিয়ে শেষ হয় এই কংগ্রেস।

ভেনেজুয়েলার স্বাধীনতা ও সাম্রাজ্যবাদবিরোধী অবস্থান : ভেনেজুয়েলাকে একটি স্বাধীন রাষ্ট্র হিসেবে নিজেকে তৈরি করে নিতে সময় লেগেছে অনেক। দীর্ঘ সময় লড়াই করতে হয়েছে, জীবন দিতে হয়েছে স্বাধীনতার জন্যে। প্রায় ৩০০ বছর স্প্যানিশ উপনিবেশের অধিনে ছিলো ভেনেজুয়েলা। ১৯ শতকের শুরুর দিকেই নিজেকে মুক্ত করার ঘোষণা করে ভেনেজুয়েলা। ১৮২১ সালে কারাবোবো সংগ্রামের মাধ্যমে স্বাধীন হয় ভেনেজুয়েলা। এর পরবর্তীতে কলম্বিয়ার সঙ্গে যুদ্ধ করতে হয় দেশটিকে। স্বাধীনতার পরে স্বৈরশাসন ব্যবস্থা শোষণ করতে থাকে জনগনকে। বলে রাখা ভালো যে, এই দেশটির রাজনীতিতে সেনা শাসন সব সময় গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করে। গণতন্ত্রের নামে দুই-দলীয় ব্যবস্থায় চলতে থাকে খাদ্য সংকট ও অন্যান্য অসন্তোষ। শাসক দল হয়ে ওঠে দুর্নীতিগ্রস্ত। এই সময়ে আন্দোলন দানা বাঁধতে শুরু করে। এক পর্যায়ে সামরিক বাহিনীর একটি অংশ বিদ্রোহ করে বসে যার নেতৃত্ব দেয় হুগো শ্যাভেজ।

যদিও সেবারে হেরে যায় শ্যাভেজ কিন্তু জনপ্রিয় হয়ে ওঠে সেনাবাহিনীর জুনিয়র অফিসার হুগো শ্যাভেজ। যে কিনা সমাজতন্ত্রে বিশ্বাসী ছিলো। পরবর্তীতে ১৯৯৮ সালে দেশটির প্রেসিডেন্ট নির্বাচনে জয়ী হয় শ্যাভেজ। শ্যাভেজ দায়িত্ব নিয়েই সংবিধানে পরিবর্তন করেন। সামাজিকভাবে মানুষের উন্নয়নে বিভিন্ন কর্মসূচি হাতে নেন তিনি। সকলের জন্যে পুষ্টিকর খাদ্য, গৃহহীনদের জন্যে আবাসন নিশ্চিত করেন তিনি। স্বাস্থ্যসেবা নিশ্চিত করতে কিউবা থেকে আনা হয় ডাক্তার। এমনকি পশুপাখির চিকিৎসার ও ব্যবস্থা করা হয়েছিলো। বড় বড় এস্টেটগুলোকে কৃষিজমিতে রুপান্তর করা হয়েছিলো।

জমি পুনর্বণ্টন করে শ্যাভেজ। পরিবেশ রক্ষায় ব্যাপক বিনিয়োগ করেন। আর এই সকল বিষয়কেই বলে ‘বলিভারিয়ান রেভ্যুলেশন’। শ্যাভেজ একটি কল্যাণমূলক রাষ্ট্র প্রতিষ্ঠার লক্ষ্যে ‘রিপাবলিক অব ভেনেজুয়েলা’র নাম পরিবর্তন করে রাখে ‘বলিভারিয়ান রিপাবলিক অব ভেনেজুয়েলা’। সে সময়ে স্বাস্থ্য ও শিক্ষার মতো আরো অন্যান্য সুবিধাগুলো দেয়া হয় বিনামূল্যে। এই সকল কাজের মাধ্যমে শ্যাভেজ মূলত সমাজতন্ত্রের দিকেই অগ্রসর হতে চেয়েছিলেন। তবে পরবর্তীতে নানা ঘাত-প্রতিঘাতের ফলে লক্ষ্য অর্জন সম্ভব হয়নি।

শ্যাভেজ দায়িত্বে আসার পর থেকেই সাম্রাজ্যবাদ বিরোধী হিসেবে প্রচার করেন নিজেকে এবং সেই অনুযায়ী কাজকর্ম পরিচালনা করেন। যা সাম্রাজ্যবাদী রাষ্ট্র আমেরিকার কাছে ভেনেজুয়েলাকে করে তোলে চক্ষুশূল। অপরদিকে মিত্র সম্পর্ক গড়ে ওঠে সমাজতান্ত্রিক মতাদর্শের রাষ্ট্র গুলোর সঙ্গে। শ্যাভেজের সময়ে তেলের দাম বৃদ্ধি পাওয়ায় প্রচুর অর্থনৈতিক লাভ হয় ভেনেজুয়েলার। সেই অর্থ দিয়েই রাষ্ট্রের সকল কল্যাণমূলক কাজ করেছিল শ্যাভেজ। সেই তেল কম মূল্যে ক্যারিবিয়ান ছোট দ্বীপ রাষ্ট্রগুলোকে দেয় শ্যাভেজ। মার্কিন সাম্রাজ্যবাদী চক্রান্ত রুখে দিয়ে শ্যাভেজ এগিয়ে যাচ্ছিল জনগণের শক্তি নিয়ে।

২০০২ সালে শ্যাভেজ বিরোধী সেনা অভুত্থান ঘটায় যুক্তরাষ্ট্র, কিন্তু জনগণের গণ-অভুত্থানের কারণে পিছুহটতে বাধ্য হয় এবং আবারো ক্ষমতায় আসে শ্যাভেজ। যুক্তরাষ্ট্রের বড় বড় তেল কোম্পানিগুলোর লাভ করতে না পারা এই ক্ষোভের বড় কারণ। তাই পরবর্তীতে ব্যার্থ ক্যু- এর পর ভেনেজুয়েলার মার্কিন মদদপুষ্ট ধনীকশ্রেণি তাদের ব্যবসা বন্ধ করে দেয়, এর ফলে দেশটির জিডিপি ২৭ শতাংশ কমে যায়। তবে জনগণের কাছে সে বারে হেরে যায় সাম্রাজ্যবাদ। পরবর্তীতে শ্যাভেজের মৃত্যুর পর দায়িত্ব গ্রহণ করেন তারই পার্টির আরেক নেতা নিকোলাস মাদুরো। মাদুরোরর থাকেন শ্যাভেজের দেখানো পথে।

তাই মার্কিন আগ্রাসন চলতেই থাকে দেশটির ওপর। মাদুরো দায়িত্ব নেওয়ার পর বিশ্ব বাজারে তেলের দাম কমে যাওয়ায় ভয়াবহ সংকট তৈরি হয় ভেনেজুয়েলায়। তেলের দাম কমানোর পেছনে সৌদি আরবকে ব্যবহার করে যুক্তরাষ্ট্র, যা তাদের আগ্রাসনের একটি ধাপ। ভেনেজুয়েলা মারাত্মকভাবে তেলনির্ভর ছিল, বিকল্প শিল্প তারা তৈরি করেনি, এই ভুলের খেসারত হিসেবে মার্কিন আগ্রাসনের ফাঁদে পড়ে যায়। বাড়তে থাকে মুদ্রাস্ফীতি। কারণ সরকার এই অবস্থা সামাল দেয়ার জন্য বাড়তি অর্থ ছাপিয়ে বাজারে ছেড়ে দেয়। যুক্তরাষ্ট্র তখন চাপিয়ে দেয় নানাবিধি নিষেধ, তাই আরো চাপে পড়ে যায় দেশটি।

এমতাবস্থায় শিক্ষা, চিকিৎসা, খাদ্য প্রকল্পে দেখা দেয় ঘাটতি এবং দেশের রাজনৈতিক পরিস্থিতিও স্থবির হয়ে পড়ে। সেই সুযোগকে কাজে লাগিয়ে নির্বাচনে জেতার পরও মাদুরোকে বাদ দিয়ে জোয়ান গুয়াইদোকে প্রেসিডেন্ট হিসেবে স্বীকৃতি দেয় যুক্তরাষ্ট্র। এনিয়ে দেশটিতে চলে অসন্তোষ, শেষ পর্যন্ত পরাজয় মেনে নিয়ে দেশ ছেড়ে যেতে হয় গুয়াইদোকে। যুক্তরাষ্ট্র এই পর্যন্ত কয়েকবার দেশটিকে নিরাপত্তার হুমকি ঘোষণা করেছে। গুয়াইদোকে প্রেসিডেন্ট ঘোষণার পর ভেনেজুয়েলার আমেরিকায় থাকা সকল ব্যাংক একাউন্ট গুয়াইদোকে হস্তান্তর করে। এমনকি বিদেশে রাখা তাদের স্বর্ণ আটকে দেয়া হয়েছে। এসব কিছুই আগ্রাসনের এক একটি রূপ।

এমনকি সশস্ত্র যুদ্ধের ঘোষণাও দেয় যুক্তরাষ্ট্র। এসব কাজের মূল কারণ ভেনেজুয়েলার বলিভারিয়ান বিপ্লবকে বিপর্যস্ত করা। যার মাধ্যমে ইউএস বহুজাতিক কোম্পানিগুলো আবার তার অবস্থানে ফিরতে পারবে। একই সাথে সমাজতান্ত্রীদের ক্ষমতা থেকে সরিয়ে মার্কিনীদের হাতের পুতুল কোন দলকে ক্ষমতায় বসানোই তাদের প্রধান লক্ষ্য। শুধু ভেনেজুয়েলা নয়, ল্যাটিন আমেরিকার অন্যান্য দেশগুলোর ওপর ও আগ্রাসন চালাচ্ছে যুক্তরাষ্ট্র। সারাবিশ্বে নিজের কতৃত্ব স্থাপন করতে চায় দেশটি।
ভেনেজুয়েলায় শ্যাভেজের বলিভারিয়ান বিপ্লব আমেরিকার সাম্রাজ্যবাদী আগ্রাসনকে বৃদ্ধাঙ্গুলি দেখিয়েছিল।

এমনকি পরবর্তী সময়েও সাম্রাজ্যবাদের সকল নীল নকসাকে প্রতিহত করেছে ভেনেজুয়েলা। তবে নিজেস্ব পরিকল্পনার ভূলের কারণে নানাবিধ সংকট তৈরি হয়েছে। তবে সেই সংকট মোকাবেলায় চেষ্টা চালিয়ে যাচ্ছে দেশটির সরকার। বলিভারিয়ান বিপ্লবের সকল স্তম্ভকে শক্তিশালী করার মধ্য দিয়ে সকল সাম্রাজ্যবাদী চক্রান্ত রুখে দিতে চায় ভেনেজুয়েলা। বাইসেন্টিয়াল কংগ্রেসে এই অঙ্গিকার ব্যক্ত করে দেশটির প্রেসিডেন্ট নিকোলাস মাদুরো। এই আয়োজনে বিশ্বের বিভিন্ন দেশের প্রতিনিধিরা তাদের স্ব-স্ব দেশের উপর সাম্রাজ্যবাদী আগ্রাসন নিয়ে আলোচনা করেন।

বাংলাদেশে ১৯৭৩ সালে ভিয়েতনামের উপর মার্কিনীদের আগ্রাসনের বিরুদ্ধে ছাত্র ইউনিয়নের সংগ্রাম ও মতিউল-কাদেরের জীবন দানের ইতিহাস যখন তুলে ধরি। তখন সকলে দাঁড়িয়ে আমাকে লাল সালাম প্রদর্শন করেন। সেই মুহুর্তে আমার গায়ে কাটা দিয়ে চোখে জল গড়িয়ে যায়। মতিউল-কাদের জীবন দিয়ে গেছেন, কিন্তু যে সম্মান আজীবনের মতো ছাত্র ইউনিয়নের প্রতিটি সদস্যের কাঁধে দিয়ে গেছে তার দায় আমরা মিটিয়ে যাবো। সাম্রাজ্যবাদী আগ্রাসনের বিরুদ্ধে ছাত্র ইউনিয়ন লড়ে যাবে সেই প্রত্যয় ব্যক্ত করি।

ভেনেজুয়েলার শিল্প-সংস্কৃতি:দীর্ঘ ২০ ঘণ্টা প্লেন জার্নি ও ১৪ ঘণ্টার ট্রানজিটের ক্লান্তি চোখে আমি যখন ভেনেজুয়েলায় নামলাম, চোখ ধাঁধিয়ে গেল ভেনেজুয়েলার প্রাকৃতিক দৃশ্য দেখে। পাহাড় আর পাহাড়, আবার কোন কোন পাহাড়ের পুরোটা জুড়েই ছোট ছোট ঘর। গাড়িতে করে হোটেলের উদ্দেশে রওনা দিলাম। জানালার বাইরে দেখছিলাম। কিছুক্ষণ পরে বুঝতে পারলাম এই শহরে একটিও ফাঁকা দেয়াল অবশিষ্ট নেই, প্রতিটি দেয়ালে আঁকা চমৎকার সব গ্রাফিতি। যেই ছবির মাধ্যমে এই অবধি ভেনেজুয়েলার লড়াই সংগ্রামের প্রতিটি গল্প কারাকাসের দেয়ালগুলোতে উঠে এসেছে। মনে পড়ে গেল আমার দেশের কথা, ধর্ষণের বিরুদ্ধে গ্রাফিতি আঁকতে গিয়ে পুলিশি হেনস্তার স্বীকার হওয়া ছাত্র ইউনিয়নের সহযোদ্ধার কথা। ভেনেজুয়েলার দেয়ালে আঁকা ছবিগুলো অদ্ভুত সুন্দর। যে কেউ দেখলেই বুঝবে এই দেশ শিল্প-সংস্কৃতিতে কতটা এগিয়ে।

ভেনেজুয়েলার সংস্কৃতি বৈচিত্র্যময়। এখানে বসবাস করে আদিবাসী, আফ্রিকান ও স্পেনীয় জনগোষ্ঠীর মানুষ। তাই এদের সবার সমন্বয়ে গড়ে উঠেছে এখানকার সংস্কৃতি, ক্যারিবীয় দেশটির সংস্কৃতির সাথে ল্যাটিন আমেরিকার অন্যান্য দেশের সংস্কৃতির মিল খুঁজে পাওয়া যায়। ভেনেজুয়েলায় পৌছানোর প্রথম দিন সন্ধ্যার পর হোটেলে একটি ছোট আকারে গেট টুগেদার হয়। সেখানে আফ্রিকান গান, বাদ্যযন্ত্র সব কিছুই মিলিয়ে আমি অবাক হয়েছিলাম। পরে বুঝতে পারি এই গানও ভেনেজুয়েলার সংস্কৃতির অংশ। আশেপাশের বিভিন্ন রাষ্ট্রের সাংস্কৃতিক উপাদানগুলোও মিশে গিয়ে ভেনেজুয়েলার সংস্কৃতিকে করেছে আরো সমৃদ্ধ। প্রতিদিনই সন্ধ্যার পরে গানের আয়োজন হতো, সেই গানের মাধ্যমে তারা তাদের সংগ্রামগুলোর কথা তুলে ধরতো আবার কখনো ফিলিস্তিনের স্বাধীনতার প্রতি সংহতি জানাতো অসাধারণ সেই পরিবেশনার মধ্য দিয়ে।

ভেনেজুয়েলার সবচেয়ে ঘনবসতিপূর্ণ শহর কারাকাস। সেখানেও শহর জুড়ে রয়েছে পাহাড়, অনেক পাহাড় ফাঁকা, আবার অনেক পাহাড়ের গোড়া থেকে আগা পর্যন্ত পুরোটায় ঘর, ছোট ছোট ঘর। কিন্তু ভবনগুলো খুব বেশি আধুনিক নয়, পুরাতন সব ঘর। প্রাচীন তাদের স্থাপত্যরীতি। যেখানে বসতি সেখানে ঘনবসতি। একটি ঘরের গায়ে আর একটি ঘর। দর্শনীয় ভবনগুলোতে নেই অনেক বেশি আধুনিকতার ছোঁয়া বরং স্থাপত্যগুলো অনেক বেশি ঐতিহ্য বহন করে। সাইমন বলিভার ও হুগো শ্যাভেজের সমাধি স্থলে যাওয়ার সৌভাগ্য হয় আমার। দুটি স্থাপত্যই ঐতিহ্যমণ্ডিত।

সাইমন বলিভারের সমাধিস্থলে রয়েছে একটি যাদুঘর, সেখানে বিভিন্ন ভাস্কর্য দিয়ে সজ্জিত, প্রতিটি ভাষ্কর্য এক একটি ইতিহাসের সাক্ষ্য দেয়। সেখানকার পুরো ছাদ জুড়ে আঁকা বিভিন্ন চিত্র, অসাধারণ সেই ছবি, সর্বোপরি একটি ভিন্নধর্মী বৈচিত্রময় সংস্কৃতির স্বাদ গ্রহণের সুযোগ হয়েছে ভেনেজুয়েলায়। সেখানের মানুষগুলো খুবই উৎসবমুখর ও প্রাণবন্ত। কখনো সালসা নৃত্য, কখনো আফ্রিকান, কখনো স্প্যানিশ গানের তালে নেচে ওঠে এখানকার মানুষ। দেয়াল জুড়ে বিপ্লবের নিমন্ত্রণ এঁকে দেয় শিল্পীরা। আবার প্রতিবাদেও সামিল করে তাদের পরিবেশনা।

কংগ্রেসের অন্যান্য দিক: বাইসেন্টিয়াল কংগ্রেস ছিল বিশ্বের ৬৮টি দেশের সমাজতান্ত্রিক মতাদর্শের মিলন মেলা। এতটা বন্ধুত্বপূর্ণ মানুষ সম্ভবত মতাদর্শ মিললেই হতে পারে। বাংলাদেশ থেকে আমি একমাত্র প্রতিনিধি হওয়ায় সেখানে পৌছে মন খারাপ লাগছিল আমার। কিন্তু বেশিক্ষণ মন খারাপ থাকেনি। আফ্রিকার বিভিন্ন দেশের বন্ধুরা আমাকে সংজ্ঞ দিয়ে গেছে। একটা সময় মনে হলো আমার গায়ের রঙ ওদের মতো বলেই কিনা এই বন্ধুত্ব, আসলে ব্যাপারটা এমন না সেটা প্রমাণ করলো আমার রোমানিয়ার বন্ধু চারাসেয়লা। আরো অসংখ্য নাম যাদেরকে আমি কখোনোই ভুলতে পারবো না।

২১ জুন কংগ্রেসের প্রথম দিনের অধিবেশন। উদ্বোধনী অনুষ্ঠানে ভেনেজুয়েলার স্বাধীনতা সংগ্রাম, কারাবোবে যুদ্ধ ও বলিভিয়ান বিপ্লব নিয়ে আলোচনা অনুষ্ঠিত হয়। দুপুরে খাবার বিরতির পর বিভিন্ন ৫ ভাগ হয়ে সেশন অনুষ্ঠিত হয়। আমার বিভাগ ছিল ‘Historical memory peoples resistance and alternative Communal models againest cultural hegemoni’ শীর্ষক টপিকে। বিকালে কমিউনাল ভিজিট অনুষ্ঠিত হয়। সন্ধার পর বিশ্বের অর্থনৈতিক ও সামরিক যুদ্ধের বিরুদ্ধে সাংস্কৃতিক পরিবেশনা অনুষ্ঠিত হয়। দ্বিতীয় দিনে যার যার উপমহাদেশ অনুযায়ী আলাদা গ্রুপে আলোচনা সেশন অনুষ্ঠিত হয়। ‘Characteraition of asia and it’s region’ টপিকে আমার আলোচনার সুযোগ হয়।

সেখানে ফিলিস্তিন থেকে আসা প্রতিনিধি ফিলিস্তিনের পরিস্থিতি তুলে ধরেন। এশিয়ার অন্যান্য সংকট নিয়েও আলোচনা হয়, বিকালের আলোচনা সভায় সাম্রাজ্যবাদ নিয়ে বিস্তর জানা বোঝার সুযোগ হয় আমার। সেই দিন ভিজিটে আমরা সাইমন বলিভারের সমাধি স্থল পরিদর্শন করি। এবং সন্ধায় ফিলিস্তিনের স্বাধীনতা সংগ্রামের প্রতি সংহতি জানিয়ে সাংস্কৃতিক পরিবেশনা অনুষ্ঠিত হয়। তৃতীয় দিনে বিভিন্ন দেশের প্রতিনিধিরা তাদের লিখিত বক্তব্য পাঠ করে মূল অধিবেশনে।

সমাপনী অধিবেশনে উপস্থিত ছিলেন বলিভিয়ার সাবেক রাষ্ট্রপতি ইভো মোরালেস, হুগো শ্যাভেজের ভাই এডান শ্যাভেজ ও সোসালিষ্ট পার্টি অফ ভেনেজুয়েলার নেতৃবৃন্দ। চতুর্থ দিনে নিকোলাস মাদুরোর সাথে প্রতিনিধিদের সভা অনুষ্ঠিত হয়। এবং হিস্টরিকাল ভিজিটে হুগো শ্যাভেজের সমাধি স্থল পরিদর্শন করানো হয়। এছাড়াও আরো অনেক ক্ষুদ্র ক্ষুদ্র আয়োজন ছিল এই কংগ্রেসে। কংগ্রেসের একটা মজার অভিজ্ঞতা ছিল আমার পোশাক ও টিপ। শাড়ি বা সেলোয়ার কামিজে বের হলেই সবাই আমাকে জিজ্ঞাসা করতো আমি ভারতীয় কিনা, সম্ভবত বেশিরভাগ প্রতিনিধির কাছে আমি এই প্রশ্নের সম্মুখীন হয়েছি।

আমার সাথে ছবি তুলতে চাইতো সবাই এই পোশাকের কারণে, বাংলাদেশ নাম শুনলেই কেমন জানি সবার মুখে একটা প্রশান্তির হাসি দেখতে পেতাম। অনেক পরিচিত এই নামটি বিশ্বের বুকে, আমি যখন রোহিঙ্গা সংকট নিয়ে আলোচনা করছিলাম, অনেক দেশের প্রতিনিধিরা গুরুত্বের সাথে আলোচনায় অংশগ্রহণ করেছেন। প্রতিটি সভা থেকে সাম্রাজ্যবাদ বিরোধী অবস্থান পরিস্কার করেছে ভেনেজুয়েলা। আলোচনা করেছে তাদের স্বাধীনতা, অর্থনীতি, শিক্ষা ব্যবস্থা ও শিল্প-সংস্কৃতি নিয়ে। প্রেসিডেন্টের বক্তব্যে মাদুরো ৬৭টি দেশের প্রতিনিধিকে অভিনন্দন জানান এবং ফিলিস্তিনসহ বিশ্বের সকল স্বাধীনতাকামী রাষ্ট্রের প্রতি পূর্ণ সংহতি জানান।

আগামী দিনে মার্কিন সাম্রাজ্যবাদ বিরোধী কঠোর অবস্থানের ঘোষণা দেন। ল্যাতিন আমেরিকার সমাজতান্ত্রিক বলয় সুসংগঠিত রাখার প্রয়াস ব্যক্ত করেন তিনি। সম্পূর্ণ আয়োজনে সংকট বলতে যা ছিল তা হচ্ছে ভাষা। সেখানে আগত ৯০ ভাগ প্রতিনিধি স্প্যানিশ ভাষায় পারদর্শী। তাই সব আয়োজনই স্প্যানিশে অনুষ্ঠিত হয়। যদিও ট্রান্সলেটর মেশিন ও ব্যক্তি ট্রান্সলেটর ছিল তবুও বুঝতে সমস্যা হচ্ছিল। ভেনেজুয়েলার বেশির ভাগ লোকই ইংরেজি জানে না। কিন্তু তাদের আতিথেয়তা সত্যিই মনোমুগ্ধকর।

সব কিছু মিলিয়ে এই পুরো সময়টাই ছিল অভিজ্ঞতার, অনেক বিচিত্র অভিজ্ঞতা হয়েছে এই কংগ্রেস থেকে, বন্ধুত্ব হয়েছে বিভিন্ন দেশের প্রতিনিধিদের সাথে। অভিজ্ঞতার পাশাপাশি দায়িত্ববোধের উপলব্ধি হয়েছে প্রতি মুহুর্তে, সংগঠনের প্রতি, দেশের প্রতি ও সারা বিশ্বের নিপীড়িত মানুষের প্রতি। তাই আগামী দিনের লড়াই সংগ্রামে নিজের সর্বোচ্চ ভূমিকা পালন করার প্রত্যয় ব্যক্ত করছি। সেই সাথে শুভকামনা থাকবে পাহাড়ে ঘেরা সুন্দর দেশটির প্রতি। তাদের অর্থনৈতিক দুর্দশা কাটিয়ে উঠুক। শ্যাভেজের স্বপ্নের সেই রাষ্ট্র নির্মাণ করতে সফল হোক ভেনেজুয়েলা, আরো একবার মানুষ সমাজতান্ত্রিক দলের প্রতি আস্থা ফিরে পাক, ভালো থাকুক ভেনেজুয়েলা ।

লেখক: সাংগঠনিক সম্পাদক,বাংলাদেশ ছাত্র ইউনিয়ন, কেন্দ্রীয় সংসদ।

 

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