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দীপু তৌহিদুল: ভ্যাকসিন নিয়ে অনুন্নত দেশগুলোর সঙ্গে উন্নত দেশগুলোর আচরণই বলে দিচ্ছে ‘করোনা’ আসলে মহামারি নয়, এটা বাস্তবে বাণিজ্যিক ও ক্ষমতার ইস্যু

দীপু তৌহিদুল: করোনা মহামারি হলে এর ভ্যাকসিন ফর্মুলা গোটা বিশ্বর সকল দেশের নিকট সমভাবে উন্মুক্ত হবার কথা ছিলো, কিন্তু সেটা ঘটেনি। ভ্যাকসিন নিয়ে অনুন্নত দেশগুলোর সঙ্গে উন্নত দেশগুলোর আচরণই বলে দিচ্ছে ‘করোনা’ আসলে মহামারি নয়, এটা বাস্তবে বাণিজ্যিক ও ক্ষমতার ইস্যু। সার্বিক অবস্থার চিত্রটা এখন তাই বলছে। শক্তিশালী রাষ্ট্রগুলোর যারাই করোনার জন্য ভ্যাকসিন বের করেছে, তারা দুর্বল রাষ্ট্রগুলোকে চাহিদা মোতাবেক নিজেদের ভ্যাকসিন সরবরাহ করছে না। ভ্যাকসিন টাকা দিয়েও পাওয়া যাচ্ছে না, আবার উপহার হিসেবে খুবই অল্প পরিমাণে (ভিক্ষা বললে ঠিক হয়) দেয়া হচ্ছে মূলত তাদের নিজস্ব উৎপাদিত ভ্যাকসিনের বাণিজ্যিক মার্কেটিং হিসেবে, এর অর্থ দেখে নে আমাদের উৎপাদিত ভ্যাকসিন করোনার বিরুদ্ধে কতো কার্যকর, ‘স্বাদ যখন একটু চেখেছ এবার আমাদের ভ্যাকসিন কিনে নেও।’ ‘করোনা’ কে যদি সত্যি সত্যি মাহামারির স্ট্যাটাস দেয়াই হতো, তাহলে ব্যাপারটা একেবারেই ভিন্ন হতো। সেক্ষেত্রে করোনা ভ্যাকসিন ফর্মুলা ও উৎপাদন অনুমতিটা সকল রাষ্ট্রের জন্য ফ্রি হবার কথা ছিলো। যে সকল রাষ্ট্রের ভ্যাকসিন উৎপাদন করার বিন্দুমাত্র সক্ষমতা রয়েছে, তারা যে যার মতন নিজস্ব প্রয়োজন অনুযায়ী করোনা ভ্যাকসিন উৎপাদন করে নাগরিকদের দিয়ে নিতো। কিন্তু সেটা ঘটেনি উন্নত রাষ্ট্রগুলির আর্থিক ও ক্ষমতার লিপ্সাজনিত রাজনীতির কারণে। তারা চাচ্ছে অনুন্নত ও দুর্বল রাষ্ট্রগুলো ঋণ করে হলেও ভ্যাকসিন কিনে নিক। আর এতে করে দুর্বল রাষ্ট্রগুলিকে দাবিয়ে রাখার সময়কাল দীর্ঘতম করা যাবে। এই নোংরা আচরণ অতি পুরাতন জমিদারি সংস্কৃতি। ভ্যাকসিন উৎপাদন করার প্ল্যান্ট পৃথিবীর বহু অনুন্নত ও দুর্বল রাষ্ট্রেরও আছে, মুশকিল তাদের কারো জন্য করোনা ভ্যাকসিন উৎপাদন করার জন্য এর ফর্মুলা উন্মুক্ত নয়। বাংলাদেশেরও কয়েকটি ওষুধ উৎপাদন কোম্পানির ভ্যাকসিন তৈরির সক্ষমতা আছে, কিন্তু অনুমতি ও ফর্মুলা নেই।

করোনা ভ্যাকসিন উন্নত রাষ্ট্রগুলি চরম ভাবে নিয়ন্ত্রণ করছে। এই চরম আচরণটা এমনই ‘ ভ্যাকসিনের অভাবে দুর্বল ও অনুন্নত দেশগুলির লোকজন মরে গেলে, মরে যাক।’ গরীব মানুষ মরলে যেমন কারোরই কিছু যায় বা আসে না, ঠিক তেমনি দুর্বল ও অনুন্নত রাষ্ট্রের নাগরিকরা মরে গেলে উন্নত রাষ্ট্রগুলির কিছু যায় বা আসে না। এই যে প্লেনে করে চাহিদার সঙ্গে অল্পকিছু ভ্যাকসিন উপহার বা ত্রাণ হিসেবে দেশের মাটিতে যখন নামে, আপনি ভীষণ খুশি হয়ে যান, এইটা হাস্যকর। কারণ আপনার যেখানে কোটি কোটি ভ্যাকসিন দরকার, সেই চাহিদার বিপরীতে আগত ভিক্ষার ভ্যাকসিন কোরবানির গরুর গলার মালার পিচ্চি একটা সুতো ছাড়া আর কিছুই না। স্যাম্পল কিংবা ফ্রি মাল স্ট্যাটাসের এসব ভিক্ষার ভ্যাকসিন কোন কাজে আসবে না। কোটি কোটি ভিক্ষুকের মাঝে মুষ্টি চালের মতন আগত ভ্যাকসিন কয়জনরে দেবেন? করোনা ভ্যাকসিন হয়তো উন্মুক্ত হতেও পারতো, কিন্তু পয়লা চোটেই আমেরিকা তথা ট্রাম্প প্রশাসন ডব্লিউএইচওর সঙ্গে ফালতু কিংবা উদ্দেশ্য প্রণোদিত ভাবে বিবাদটা বাধিয়ে সব কিছু ধ্বংস করে দিয়েছে। আমেরিকার এই বিবাদের ফলে উন্নত রাষ্ট্রগুলো যে যার মতন ভ্যাকসিন রাজনীতিতে জড়িয়ে গেছে এবং ‘করোনা’ মহামারির স্ট্যাটাসটা হারিয়ে গ্লোবাল পলিটিক্সের ইস্যুতে পরিণত হয়েছে। যেখানে মহামারি হিসেবে করোনার ভ্যাকসিন নিয়ে একটা একক প্ল্যাটফরম তৈরি হবার কথা ছিলো, সেটা আমেরিকা, রাশিয়া আর চীন মিলেই করতে দেয়নি।

ভ্যাকসিন নিয়ে গেমটা প্রথম আমেরিকাই খেলেছে, যার ফলে বাকিরাও একই ধারার তাদের রাজনীতি এগিয়ে নিয়েছে। আমেরিকা, চীন ও রাশিয়া করোনার ভ্যাকসিন নিয়ন্ত্রণ করার মাধ্যমে গোটা বিশ্বর দুর্বল ও অনুন্নত রাষ্ট্রগুলোর মানুষদের সরাসরি মৃত্যুর মুখে ঠেলে দিয়েছে, এটাই সত্যি। এতে করে যা ঘটবে, করোনা আর খুব সহজে আর নিয়ন্ত্রণেই আসবে না। কারন সকল রাষ্ট্রের নাগরিকরা করোনার ভ্যাকসিন পাবেও না এবং তারা করোনা আক্রান্ত হতে হতে নিত্য নতুন করোনার জাত উৎপাদন করেই যাবে। আজ করোনার ভারতীয়, আফ্রিকান, ব্রিটিশ জাত দেখছেন। কাল দেখবেন করোনার বিধ্বংসী বাংলাদেশি কিংবা কেনিয়ার নতুন কোনো জাত, হতেই পারে, পারে না? একটা বিষয় মাথায় রাখতে হবে ভারত, আফ্রিকা, ব্রিটেন করোনার জাত বের করেনি, তাদের নাগরিকরাই আক্রান্ত হতে হতেই আজকের এই দুর্দশা। এর জন্য উক্ত রাষ্ট্রগুলো কিংবা তাদের নাগরিকরা দায়ী নয়। মূল দায়ী আমেরিকা, রাশিয়া এবং চীন রাষ্ট্র, কারণ তারা করোনার ভ্যাকসিন কঠোর ভাবে নিয়ন্ত্রণ করে যাচ্ছে। করোনার ভ্যাকসিন নিয়ে আমেরিকা, রাশিয়া এবং চীনের বাণিজ্যিক ও রাজনৈতিক চেইন ভাঙ্গার ক্ষমতা জাতিসংঘ ও তার অঙ্গ সংগঠন ডব্লিউএইচওর বিন্দুমাত্র নেই। এই তিন রাষ্ট্রের শক্তির কাছে সবাই জিম্মি। সকল রাষ্ট্র একক প্ল্যাটফরমে কাজটা করলে করোনা ভাইরাসকে নিয়ন্ত্রণ করা পানি ভাত টাইপের কিছু হতো, সেটি আর হবে না। আর সেটা হবে না বলে করোনা ভাইরাস বেশ দীর্ঘ সময় ধরে এই পৃথিবীতে তার রাজত্ব বহাল রাখবে। আর এই সময়টায় দুর্বল ও অনুন্নত রাষ্ট্রগুলি হতে আমেরিকা, চীন এবং রাশিয়া নানা ভাবে অনেক কিছু বাগিয়ে নিয়ে যাবে। লকডাউন আর কাটডাউন যাইই করেন, কোনো কিছুতেই আর করোনা দমে যাবে না। সে তার মতন কাজ করতে থাকবে। একটা সময় লক লক ডাউন ফর্মুলাটা সবাই বাদ দেবে। বাদ না দিয়েও কোনো উপায় থাকবে না। রাষ্ট্রের সহ্য ক্ষমতারও সীমা আছে। এখন বলেন করোনা ভাইরাস থেকে আমাদের বেঁচে থাকার জন্য উপায় কী? মাস্ক পরুন,শারীরিক দূরত্ব বজায় রাখুন, গণ জমায়েতকে এড়িয়ে চলুন। এতে করে আমরা ধীর গতিতে করোনা ভাইরাস খেতে খেতে একটা সময় হয়তোবা করোনা হজম করতে সক্ষম হয়ে ওঠবো। এই হজম শক্তি অর্জন করতে কিছুটা সময় ধৈর্য ধরা ছাড়া উপায় নেই। এই দীর্ঘ প্রক্রিয়ায় হয় আমি মরবো, অথবা আপনি দেয়ালের ছবি হয়ে ঝুলে যাবেন। ফেসবুক থেকে

 

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