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প্রচ্ছদ

সর্বশেষ খবর :

সোনা চোরাচালানের নতুন রুট বাংলাদেশ-মিয়ানমার সীমান্তের একাধিক পয়েন্ট

জনকণ্ঠ: মরণনেশা ইয়াবার চালান রোধে যেখানে সর্বমুখী তৎপরতা অব্যাহত রয়েছে সেখানে এখন যুক্ত হয়ে আছে মিয়ানমার সীমান্ত দিয়ে সোনা চোরাচালান। একাধিক পয়েন্ট দিয়ে মিয়ানমার থেকে বাংলাদেশে চলে আসছে সোনার বার ও অলঙ্কার। সোনা চোরাচালানের নতুন রুটে পরিণত হয়েছে বাংলাদেশ-মিয়ানমার সীমান্তের একাধিক পয়েন্ট। মূলত ইয়াবা ডনরাই সোনা চোরাচালানের সঙ্গে যুক্ত বলে গোয়েন্দাসহ আইনশৃঙ্খলা রক্ষাকারী বিভিন্ন সংস্থার বিভিন্ন সূত্রের অভিযোগ।

২০১৭ সালের ২৫ আগস্টের পর যখন লাখে লাখে রোহিঙ্গারা বাংলাদেশে অনুপ্রবেশ করে তখন রোহিঙ্গা নারীরা তাদের ব্যবহৃত স্বর্ণালঙ্কারও নিয়ে আসতে সক্ষম হয়। এ সময় অনুপ্রবেশ করেছে ইয়াবা কারবারে জড়িত ক্যারিয়াররা, অস্ত্রসহ রোহিঙ্গা সন্ত্রাসী গোষ্ঠীর সদস্যরাও। যখন উখিয়া টেকনাফের ৩৪ শিবির ও টালে (বস্তি) রোহিঙ্গাদের আশ্রয় দেয়া হয় এর পরবর্তী সময়ে দেখা যায় সব শিবিরে একের পর এক গড়ে উঠতে থাকে ফার্মেসি, স্বর্ণের দোকান ও মোবাইল ফোনের সিম বিক্রির দোকান। এছাড়া সাধারণ পণ্য সামগ্রী এমনকি তাদের রেশনের সামগ্রী বিক্রির দোকান পাটও গড়ে উঠে। ফার্মেসি এবং স্বর্ণের দোকান গড়ে তোলার নেপথ্যে রয়েছে চোরাচালানের ইয়াবা ও সোনা বিক্রির অবৈধ তৎপরতা। প্রথমে বিষয়টি বুঝে উঠা যায়নি। পরবর্তীতে ধীরে ধীরে এটি পরিষ্কার হয়ে এখন একেবারেই স্পষ্ট।

কক্সবাজারের প্রশাসন দীর্ঘদিন ধরে ইয়াবা চোরাচালান রোধে ইয়াবা ডন ও ক্যারিয়ারদের চিহ্নিত করার কাজে ব্যস্ত ছিল। এরপর ধরপাকড়। আরও পরে নজরকাড়া বন্দুকযুদ্ধের নানা ঘটনা। এরপরেও ইয়াবা চোরাচালান রোধ করা যাচ্ছে না। সারাদেশেই ইয়াবা ছড়িয়ে গেছে। ধরা পড়ছে হাতেগোনা বিভিন্ন পয়েন্টে। স্থল, নৌ ও সমুদ্র পথে সর্বত্র ইয়াবার চালান অব্যাহত রয়েছে। মিয়ানমারে উৎপাদিত মরণনেশার এ ট্যাবলেটের গন্তব্য একমাত্র বাংলাদেশ।

বর্তমানে ইয়াবার সঙ্গে পাল্লা দিয়ে সোনা চোরাচালান চলছে দেদার। এর নেপথ্যেও রয়েছে ইয়াবার গডফাদাররা। ইয়াবার মতো সোনা চোরাচালানে ক্যারিয়ার হিসেবে জড়িত অধিকাংশই রোহিঙ্গা জনগোষ্ঠীর সদস্য। সীমান্তের বাংলাদেশী অংশ সিল করা আছে বহু আগে থেকেই যাতে নতুন করে কোন রোহিঙ্গা প্রবেশ করতে না পারে। সেটা অনেকাংশে রোধ হয়েছে। কিন্তু ইয়াবা চোরাচালান রোধ করা যাচ্ছে না। এখন নতুন রুট খোলা হয়েছে সোনা চোলাচালানের। বাংলাদেশে প্রতিভরি সোনার মূল্য যখন যে পরিমাণই থাকুক না কেন, মিয়ানমারে এর মূল্য সব সময় এদেশের চেয়ে কম। ফলে ইয়াবা কারবারিরা এখন সোনা চোরাচালানের দিকেও ঝুঁকে গেছে। কক্সবাজার পুলিশ প্রশাসনের হিসাব মতে, এ পর্যন্ত শতাধিক চোরাচালানিকে আটক করা হয়েছে, যাদের বেশিরভাগ রোহিঙ্গা। বিভিন্ন পয়েন্টে ধরা পড়ছে সোনার বার। মিয়ানমার থেকে এ পারে আনার পথে অনেক সময় সন্ত্রাসীরা সোনা লুট করে নেয়ার ঘটনাও রয়েছে। এদিকে উখিয়া টেকনাফের আশ্রয় শিবির অভ্যন্তরে তিন শতাধিক ফার্মেসি ও সোনার দোকান দৃশ্যমান। এর সঙ্গে যুক্ত রয়েছে মুদি, কাপড়, তরিতরকারি, রেস্তরাঁ, প্রসাধনী ও ত্রাণ সামগ্রী বিক্রির দোকানপাট। পাশাপাশি রয়েছে ইন্টারনেট ও মোবাইল সিম বিক্রির ছোটবড় বিভিন্ন দোকান। আন্তর্জাতিক শরণার্থী আইন অনুসারে উদ্বাস্তুরা যে দেশে আশ্রিত সে দেশের নির্দিষ্ট আশ্রয় শিবিরে থাকা বাধ্যতামূলক। কোন ধরনের ব্যবসা বাণিজ্যে জড়িত থাকার সুযোগ নেই এদের। এমনকি বিদেশী কোন মুদ্রা রাখাও দÐনীয় অপরাধ। কিন্তু এসবের কিছুই মানা হচ্ছে না আশ্রয় শিবিরগুলোতে। অভিযোগ রয়েছে, কিছু এনজিও সংস্থার সহযোগিতায় শিবিরগুলোতে এ ধরনের ব্যবসা বাণিজ্য প্রতিষ্ঠান গড়ে উঠেছে। কক্সবাজার জেলার টাস্কফোর্স কমিটির সভায় এসব অবৈধ দোকানপাট উচ্ছেদের সিদ্ধান্ত নিয়েও তা বাস্তবায়ন হয়নি। বুধবার শরণার্থী ত্রাণ ও প্রত্যাবাসন কমিশনার (আরআরসি) কার্যালয় সূত্র জানিয়েছে, শীঘ্রই শিবিেের অভিযান পরিচালনা করে এ জাতীয় দোকানপাট উচ্ছেদ করা হবে।

স্থানীয় সূত্রগুলো জানিয়েছে, ইয়াবা ও স্বর্ণের চোরাচালানি ব্যবসা সহজ করতে রোহিঙ্গারা শিবির অভ্যন্তরে ফার্মেসি ও সোনা বেচাকেনার দোকান বসিয়েছে। উখিয়া টেকনাফে ৩৪ আশ্রয় শিবিরে এসব সোনার দোকান ও ফার্মেসির অবস্থান । আর এসব দোকানের মালিকানাও রোহিঙ্গাদের।

সূত্র জানায়, সীমান্ত এলাকার চিহ্নিত ইয়াবা ডনরা রোহিঙ্গাদের মাধ্যমে স্বর্ণের চালান দেশে আনছে। সীমান্ত গলিয়ে এসব চালান এনে প্রথমে রাখা হয় রোহিঙ্গা শিবিরে। পরে সুযোগ বুঝে সরবরাহ করে দেয়া হয় নির্দিষ্ট পয়েন্টে। বিজিবির (বর্ডার গার্ড বাংলাদেশ) ভাষ্য মতে মিয়ানমার সীমান্ত থেকে বাংলাদেশে চোরাইপণ্য ও সে দেশের কোন নাগরিক যেন অনুপ্রবেশ করতে না পারে, সেজন্য বর্ডার সিল করা আছে। এরপরও স্থল ও নদীপথে রোহিঙ্গা ক্যারিয়াররা এসব চোরাচালানের সোনা ও ইয়াবা নিয়ে আসছে। ধরাও পড়ছে। প্রাপ্ত তথ্যে জানা গেছে, বালুখালী, ধামনখালী, রহমতের বিল, ঘুমধুম-তুমব্রæ ও উলুবনিয়া সীমান্ত পয়েন্ট দিয়ে অহরহ রোহিঙ্গা অনুপ্রবেশসহ স্বর্ণ ও ইয়াবার চালান এসে থাকে। সোনার বার ছাড়াও অনেক সময় তৈরি করা অলঙ্কারও চোরাইপথে দেশে আনছে। মিয়ানমারে তুলনামুলকভাবে স্বর্ণের দাম কম বিধায় ইয়াবা ডনরা বর্তমানে সোনা চোরাচালানের কারবারে ঝুঁকে পড়েছে। উখিয়ার কুতুপালং, বালুখালী, হাকিমপাড়া, শফিউল্লাহকাটা, টেকনাফের চাকমারকুল, উনচিপ্রাং, লেদা, নয়াপাড়া ও মুচনী ক্যাম্পে কয়েকশ স্বর্ণের দোকান ও ফার্মেসি রয়েছে। এসব দোকানের বৈধ কোন লাইসেন্সও নেই। কয়েকটির ট্রেড লাইসেন্স থাকলেও তা স্থানীয়দের নাম দিয়ে সংগ্রহ করেছে রোহিঙ্গারা। গত রবিবার ভোর রাতে উখিয়ার কুতুপালং রোহিঙ্গা ক্যাম্পে এপিবিএন পুলিশ সদস্যরা রোহিঙ্গা মোহাম্মদ আইয়ুবের কক্ষে অভিযান চালিয়ে স্বর্ণের বারসহ বিপুল পরিমাণ দেশী ও বিদেশী মুদ্রা উদ্ধার করেছে। এ সময় রোহিঙ্গা আয়ুব ও স্ত্রী নুরেন্নেচ্ছাকে আটক করা হয়। ১৪ এপিবিএন ব্যাটালিয়নের অধিনায়ক এসপি মোঃ নাঈমুল হক জানিয়েছেন, ঝুপড়িকক্ষের মেঝ খুঁড়ে মাটির ভেতর থেকে এক এক বের হয়ে আসে ৭০ ভরি স্বর্ণ ও বিপুল মুদ্রা। আর্মড পুলিশের অভিযানে বাংলাদেশী নগদ ২৬ লাখ ৩ হাজার ১২০ টাকা, মিয়ানমারের বার্মিজ মুদ্রা ৩১ লাখ ৭৪ হাজার ৮শ’ কিয়াত, ৭০ ভরি ওজনের ৩টি স্বর্ণের বার ও স্বর্ণালঙ্কারসহ দুই রোহিঙ্গা নারী-পুরুষকে আটক করা হয়। এ জাতীয় বহু চালান ধরা পড়ার ঘটনা রয়েছে। কখনও আসছে বার আবার কখনও আসছে তৈরি অলঙ্কার রূপে।

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