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প্রচ্ছদ

সর্বশেষ খবর :

হাসপাতালে আয়েশি জীবন কাটাচ্ছে ভিআইপি বন্দিরা

যুগান্তর: নানা রোগের ছুতোয় হাসপাতালে আয়েশি জীবন কাটাচ্ছেন ‘ভিআইপি বন্দিরা’। খুন, অস্ত্র, মাদক ও অর্থ আত্মসাৎ মামলার আসামি হয়েও ঘুরেফিরে তারা পছন্দের হাসপাতালেই থাকছেন। এদের একজন প্রথম দফায় টানা ৮ মাস এবং বর্তমানে সাত মাস ধরে হাসপাতালেই আছেন। অপর এক বন্দি হাসপাতালে ছিলেন টানা ১৬ মাস।

তাকে কারাগারে ফেরাতে ২৭ বার চিঠি দেওয়া হয়েছিল। কিন্তু কাজ হয়নি। আরও অনেকেই আছেন যারা মাসের পর মাস বিভিন্ন হাসপাতালে আছেন। কারাগার ও হাসপাতালের ঊর্ধ্বতন কর্মকর্তাদের একটি চক্র মোটা টাকার বিনিময়ে অসুস্থতার অজুহাতে তাদের হাসপাতালে থাকার সুযোগ করে দিচ্ছেন বলে অভিযোগ আছে। অথচ গ্রেফতারের আগে এসব আসামি সুস্থ-স্বাভাবিক জীবনে চষে বেড়িয়েছেন দেশ-বিদেশ।

অভিযোগ আছে, এরা প্রভাব খাটিয়ে হাসপাতাল কেবিনেই গড়েছেন ‘স্থায়ী নিবাস’। সেখান থেকেই চালিয়ে যাচ্ছেন ব্যবসা-বাণিজ্য। মুক্তজীবনে ফিরতে নানা মহলে তদবিরও করছেন। অথচ সাময়িক সময়ের চিকিৎসার জন্য তাদের কারাগার থেকে হাসপাতালে পাঠানো হয়েছিল। চিকিৎসা শেষে তাদের ফেরত পাঠানোর কথা থাকলেও হাসপাতাল কর্তৃপক্ষ তা করছেন না। ফলে এদের অনেকেই বন্দি জীবনের বেশির ভাগ সময় ঘুরেফিরে হাসপাতালেই কাটাচ্ছেন। কারাগার থেকে হাসপাতাল কর্তৃপক্ষকে পাঠানো চিঠির সূত্র ধরে অনুসন্ধানে জানা গেছে চাঞ্চল্যকর এসব তথ্য।

জানা গেছে, যুবলীগের বহিষ্কৃত নেতা ইসমাইল হোসেন চৌধুরী সম্রাট, বিতর্কিত ঠিকাদার এসএম গোলাম কিবরিয়া ওরফে জি কে শামীম ও ডেসটিনি গ্রুপের কর্ণধার রফিকুল আমীন কারাগারে ‘ভিআইপি বন্দি’ হিসেবে পরিচিত। কারণ গ্রেফতারের পর থেকেই তারা ঘুরেফিরে কারাগারের চেয়ে হাসপাতালেই বেশি সময় থাকছেন। মাঝে মধ্যে কঠোর সমালোচনার মুখে তাদের কারাগারে ফেরত পাঠানো হয়। কিন্তু সেখানেও থাকেন কারা হাসপাতালে। তাদের কখনোই কারাগারের সাধারণ সেলে থাকতে হয়নি। এ কারণেই এদের গায়ে লেগেছে ভিআইপি তকমা। এমন আরও অনেক প্রভাবশালী বন্দি আছেন যারা কারাবাস নয়, হাসপাতাল বাসে পার করছেন সাজার মেয়াদ।

এ ব্যাপারে ঢাকা কেন্দ্রীয় কারাগারের জেলার মাহবুবুল ইসলাম বলেন, সম্রাটের শারীরিক অবস্থা খুব বেশি ভালো নয়। তার কার্ডিয়াক সমস্যা আরও জটিল হয়েছে। তাই তিনি হাসপাতালে আছেন। জি কে শামীমকে পাঠানোর পর করোনা ধরা পড়ে। আর রফিকুল আমীনের ডায়াবেটিস খুব বেশি ওঠানামা করছে তাই তাকে হাসপাতালে পাঠানো হয়েছে। তিনি বলেন, এদের নিরাপত্তা দিতে দৈনিক নিয়োগ করা হয় ২০০ কারারক্ষী। এতে কারা কর্তৃপক্ষকে হিমশিম খেতে হয়।

তাদের ফিরিয়ে নেওয়ার বিষয়ে জানতে চাইলে কারা অধিদপ্তরের ঢাকা ডিভিশনের উপমহাপরিদর্শক (ডিআইজি প্রিজন) তৌহিদুর রহমান বলেন, ‘অসুস্থ হলে চিকিৎসকের পরামর্শে কারা কর্তৃপক্ষ বন্দিদের হাসপাতালে পাঠায়। কিন্তু ছাড়পত্র দিয়ে ফেরত পাঠানোর দায়িত্ব হাসপাতাল কর্তৃপক্ষের। কারা কর্তৃপক্ষ প্রতি ১৫ দিন পর আসামিদের ফেরত পাঠানোর তাগাদা দিয়ে চিঠি পাঠাচ্ছে।’

কারা কর্তৃপক্ষের অভিযোগের বিষয়ে জানতে চাইলে বিএসএমএমইউর উপাচার্য শারফুদ্দিন আহমেদ বলেন, ‘কারাগারের অধীনে আমাদের এখানে একটি ইউনিট চলে। অসুস্থ হাজতি ও কয়েদিদের কারা কর্তৃপক্ষের ইচ্ছা অনুযায়ীই এখানে ভর্তি করা হয়। সুস্থ কাউকে এখানে থাকতে দেওয়ার কোনো এখতিয়ার আমাদের নেই। কেউ সুস্থ হয়ে থাকলে কারা কর্তৃপক্ষ যে কোনো সময় তাকে নিয়ে যেতে পারে। চিকিৎসা ছাড়া বা অসুস্থ নয় এমন কেউ থাকলে পরিচালককে বলব তাদের দ্রুত ফেরত পাঠাতে।

সংশ্লিষ্ট নথিপত্রে দেখা গেছে, ক্যাসিনোবিরোধী অভিযানকালে ২০১৯ সালের ৬ অক্টোবর গ্রেফতারের পর মহানগর দক্ষিণ যুবলীগের সভাপতির পদ থেকে বহিষ্কৃত হন ইসমাইল হোসেন চৌধুরী সম্রাট। তার বিরুদ্ধে মাদক, অস্ত্র আইন ও অবৈধ সম্পদ অর্জনের অভিযোগে মামলা হয়। গ্রেফতারের পর তিনি কিছুদিন কারা হাসপাতালে ছিলেন। মাসখানেকের মধ্যেই ওই বছরের ২৪ নভেম্বর তিনি ‘বুকে ব্যথা’ নিয়ে বঙ্গবন্ধু শেখ মুজিব মেডিকেল বিশ্ববিদ্যালয় (বিএসএমএমইউ) হাসপাতালে ভর্তি হন। সে দফায় তিনি হাসপাতালে ছিলেন টানা ৮ মাস।

ভর্তির পর গত বছরের জুলাই পর্যন্ত তাকে ফেরত পেতে কারাগার থেকে বিএসএমএমইউ কর্তৃপক্ষকে ১১টি চিঠি দেওয়া হয়েছিল। এ নিয়ে তখন গণমাধ্যমে খবর প্রকাশিত হলে ব্যাপক সমালোচনার মুখে তাকে ঢাকা কেন্দ্রীয় কারাগারে ফেরত পাঠানো হয়। সেখানে গিয়েও তিনি কারা হাসপাতালেই থাকেন।

সবশেষ ফের তিনি বিএসএমইউতে ভর্তি হন গত বছরের ২৪ নভেম্বর। এখন পর্যন্ত তিনি আছেন প্রিজন এনেক্স ভবনের কেবিনে। তাকে কারাগারে ফেরত পাঠানোর অনুরোধ জানিয়ে এ পর্যন্ত ১০টি চিঠি পাঠানো হয়েছে। সবশেষ চিঠি দেওয়া হয় গত ১ জুন। কিন্তু তাকে ফেরত পাঠাচ্ছে না বিএসএমএমইউ কর্তৃপক্ষ।

তবে কারাগারের এক চিকিৎসক নাম প্রকাশ না করার শর্তে বলেছেন, সম্রাটের শারীরিক অবস্থা আসলেই ভালো নয়। নানা ধরনের জটিলতায় ভুগছেন তিনি। তার উন্নত চিকিৎসা প্রয়োজন। একইভাবে গত বছরের ২০ সেপ্টেম্বর গ্রেফতারের পর ঘুরেফিরে হাসপাতালের শীতাতপ নিয়ন্ত্রিত কেবিনে আয়েশি সময় কাটাচ্ছেন বিতর্কিত ঠিকাদার এস এম গোলাম কিবরিয়া ওরফে জি কে শামীম। শেষ দফায় তিনি গত ১৫ এপ্রিল বিএসএমএমইউতে ভর্তি হন।

‘বুকে ব্যথা’ অনুভব করলে অস্ত্র ও মাদক মামলার এই আসামিকে কারাগার থেকে হাসপাতালে পাঠানো হয়েছিল। চিকিৎসা শেষে দুই দিনের মধ্যে তাকে কারাগারে পাঠানোর কথা। কিন্তু এখনো তাকে ফেরত পাঠানো হয়নি। এ কারণে মে মাসে দুটি ও সবশেষ ১ জুন একটি চিঠি দেওয়া হয়। অভিযোগ আছে, মোটা টাকা খরচ করে অসুস্থতার ছুতায় হাসপাতালের শীতাতপ নিয়ন্ত্রিত কেবিনে থাকেন জি কে শামীম।

পরিচিতজনদের সঙ্গে নিয়মিত দেখাসাক্ষাৎ করেন। সেখানে বসেই তিনি ব্যবসা-বাণিজ্য চালাচ্ছেন। জামিনের জন্য তদবিরও করছেন। কিন্তু এ ব্যাপারে এখনো কোনো মহল থেকেই সবুজ সংকেত পাননি বলে তার ঘনিষ্ঠ সূত্র নিশ্চিত করেছে। আগের দফায় গত বছরের ৪ এপ্রিল হাসপাতালে ভর্তি হলে ৭ বার চিঠি চালাচালির পর কারাগারে ফেরত পাঠানো হলেও কয়েদিদের সেলে থাকেননি তিনি। থেকেছেন কারা হাসপাতালে।

হাসপাতালে থাকার ক্ষেত্রে সম্রাট-শামীমকেও পেছনে ফেলেছেন ডেসটিনি গ্রুপের কর্ণধার রফিকুল আমীন। নানা বাহানায় তিনি টানা এক বছরের বেশি সময়ও হাসপাতালে আয়েশি সময় কাটিয়েছেন। শেষ দফায় গত ১১ এপ্রিল তিনি হাসপাতালে ভর্তি হন। তাকে ফেরত দিতে এরই মধ্যে তিন দফা চিঠি দেওয়া হয়েছে। কারা নথিতে দেখা গেছে, ২০১২ সালে গ্রেফতার হওয়ার পর রোগী হিসেবে বেশির ভাগ সময় রফিকুল আমীন বারডেম ও বিএসএমএমইউ হাসপাতালে থেকেছেন।

তিনি সর্বোচ্চ টানা ১ বছর ৪ মাস হাসপাতালে থেকেছেন। তখন তাকে ফেরত নিতে ২৭ বার চিঠি পাঠানোর বিষয়টি ফাঁস হলে তোলপাড় সৃষ্টি হয়। ওই সময় তাকে কারাগারে ফেরত পাঠাতে বাধ্য হয়েছিল বিএসএমএমইউ। কিন্তু বেশিদিন কারাভ্যন্তরে থাকেননি তিনি। আবার ফিরেছেন বিএসএমএমইউতে। তবে তিনি অসুস্থ বলে দাবি করেছেন তার স্বজন ও কারাগারের চিকিৎসকরা।

এদিকে অস্ট্রেলিয়ান ইন্টারন্যাশনাল স্কুলের শিক্ষিকা জয়ন্তী রেজা হত্যা মামলার যাবজ্জীবন সাজাপ্রাপ্ত আসামি আজম রেজাসহ ২০ থেকে ৩০ জন বন্দি সুযোগ পেলেই নানা ছুতোয় সব সময়ই বিভিন্ন হাসপাতালে কাটান বলে কারা নথিতেই তথ্য রয়েছে।

আইনবিদ ড. শাহদীন মালিক বলেন, এই বেআইনি সুযোগ-সুবিধা থেকে স্পষ্ট, এরা অপরাধ জগতের ক্ষমতাধর ব্যক্তি। এদের প্রচুর অর্থবিত্ত আছে। কাদের সুপারিশে দীর্ঘ সময় ধরে তারা হাসপাতালে থাকছেন, তা-ও দেখা উচিত। যারা কারাগারে যাচ্ছেন বা আছেন, তাদের চিকিৎসাসেবা পেতে অনেক ক্ষেত্রে আদালতের আদেশ লাগছে। এসব বন্ধে কারাগারের অভ্যন্তরীণ দুর্নীতির অনুসন্ধান করা উচিত।

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