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প্রচ্ছদ

সর্বশেষ খবর :

চামড়ার দাম বাড়লেও মৌসুমী ব্যবসায়ীদের ভাগ্য ফেরেনি

বিডিনিউজ টোয়েন্টিফোর ডটকম: রাকিব-সাকিব দুই ভাই, বিভিন্ন স্থান থেকে সংগ্রহ করা ৩০টি কোরবানির গরুর চামড়া নিয়ে বসে ছিলেন বন্দরনগরী চট্টগ্রামের চৌমুহনী এলাকায়।

তারা জানান, প্রতিটি ৩০০ টাকায় কিনে বিক্রির জন্য নিয়ে এসেছেন। তার সঙ্গে যুক্ত হয়েছে গাড়িভাড়া ও শ্রমিক খরচ। কিন্তু আড়তদারের প্রতিনিধি সেসব চামড়ার দর করছে ২০০ টাকা।

নগরীর বিভিন্ন স্থান থেকে চামড়া সংগ্রহ করে আগ্রাবাদ চৌমুহনী এলাকায় আসা সব মৌসুমী ব্যবসায়ী ও ফড়িয়াদের একই কথা।

তাদের অভিযোগ, সরকার চামড়ার দাম বাড়ালেও আড়তদাররা কৌশলে দাম দিচ্ছেন না তাদের। সকালে যা একটু দর ছিল, দিনের শেষে সেই দাম আরও কমতে শুরু করেছে।

কোরবানির পশুর চামড়া বাড়ি বাড়ি গিয়ে সংগ্রহ করে মৌসুমি ব্যবসায়ী আর ফড়িয়ারা। তারা সেটা বিক্রি করে আড়তদারদের কাছে। সেখান থেকে চামড়া যায় ট্যানারিতে।

ট্যানারি মালিকরা কত দামে আড়তদারদের কাছ থেকে কোরবানি পশুর চামড়া সংগ্রহ করবে, সে দাম নির্ধারণ করে দেয় বাণিজ্য মন্ত্রণালয়।

গত বছরের চেয়ে এবছর সেই দাম বাড়ানো হয়েছে। প্রতি বর্গফুট গরু-মহিষের চামড়া ঢাকার ট্যানারি মালিকরা এবার কিনবেন ৪০ থেকে ৪৫ টাকায়; গত বছর এই দাম ছিল ৩৫ থেকে ৪০ টাকা।

ঢাকার বাইরে লবণযুক্ত প্রতি বর্গফুট গরু বা মহিষের চামড়ার দাম হবে ৩৩ টাকা থেকে ৩৭ টাকা, গত বছর যা ২৮ থেকে ৩২ টাকা ছিল।

সারাদেশে লবণযুক্ত খাসির চামড়া প্রতি বর্গফুট ১৫ থেকে ১৭ টাকা, আর বকরির চামড়া প্রতি বর্গফুট ১২ থেকে ১৪ টাকা নির্ধারণ করা হয়েছে।

কয়েক বছর আগেও যেসব চামড়া বিক্রি হত ২৫০০-৩০০০ টাকায়, এবার সেসব চামড়ার দাম ২৫০ টাকার বেশি উঠছে না।

কোরবানির পশুর চামড়ার দাম এবার সামান্য বাড়ল

কোরবানি: চামড়া সংগ্রহে ‘দুঃসময়’ কাটবে?

গত দুই বছর ধরে চামড়ার বাজারের মন্দাভাব থাকায় মৌসুমি ব্যবসায়ীরা একপ্রকার অদৃশ্য হয়ে গেছে। তবুও করোনাভাইরাস মহামারীকালে কিছু লাভের আশায় যেসব ব্যক্তি চামড়া সংগ্রহ করেছে, তারা বলছে, এবছরের দর গতবারের চেয়েও কম।

চট্টগ্রামের বিভিন্ন স্থান থেকে চামড়া সংগ্রহ করে চৌমুহনী এলাকায় নিয়ে যাওয়া হয়। সেখান থেকে আড়তদারের প্রতিনিধিরা চামড়া সংগ্রহ করে মুরাদপুর এলাকায় আড়তে পাঠিয়ে দেয়।

 

বুধবার বিকালে চৌমুহনী এলাকায় গিয়ে দেখা যায়, অনেকেই চামড়া নিয়ে বসে আছেন বিক্রির আশায়। আড়তদারের প্রতিনিধি গিয়ে দর করলেও তারা চামড়া বিক্রি না করে বসে আছেন।

মো. ইউনুস নামের একজন জানান, চৌমুহনী বাজারের এক ব্যবসায়ীর প্রতিনিধি হয়ে তিনি সেখানে চামড়া নিয়ে বসেছেন। আড়তদারের প্রতিনিধি এসে তাদের কাছ থেকে চামড়া কিনে নিয়ে যাবেন।

তিনি টোয়েন্টিফোর ডটকমকে বলেন, আগে নগরীর বিভিন্ন এলাকা থেকে চামড়া সংগ্রহ করে নিয়ে আসতেন তারা। এবছর যারা চামড়া নিয়ে চৌমুহনী যাচ্ছেন, শুধু তাদের কাছ থেকে চামড়া সংগ্রহ করছেন। পরে সেগুলো আড়তদারদের কাছে বিক্রি করবেন।

ইউনুস বলেন, গত দুই বছর ধরে চামড়ার বাজার মন্দা। এবছর যারা চৌমুহনীতে চামড়া নিয়ে যাচ্ছেন তাদের কাছ থেকে প্রকারভেদে ১৩০ থেকে ১৮০ টাকায় চামড়া কিনে নিয়েছেন। এরসাথে শ্রমিক খরচসহ মিলিয়ে আরও কিছু টাকা খরচ আছে। কিন্তু আড়তদারের প্রতিনিধিরা এসব চামড়ার দাম করছে ২০০-২২০ টাকা।

ইউনুস আরও জানান, গত বছর ২৮০ থেকে ৩০০ টাকায় তারা চামড়া সংগ্রহ করে ৪০০ টাকা পর্যন্ত বিক্রি করেছেন। কিন্তু এবার আর সেই দরও পাওয়া যাচ্ছে না।

ইউনুসের সুরে কথা বললেন মাসুদ, রাজ্জাক, ফেরদৌস, পারভেজ নামে আরও কয়েকজন মৌসুমী ব্যবসায়ী।

তারা জানান, অন্যান্য বছর আড়তদারের প্রতিনিধিরা সেখানে গেলেও এবার কেউ যাচ্ছে না। যে কয়েক জন আছে তারা ‘সিন্ডিকেট’ করে দাম কমিয়ে দিচ্ছে। সকালে তারা বেশি দামে কিনলেও বিকাল হতে হতে সে দাম অর্ধেকে নামিয়ে এনেছে।

নগরীর পশ্চিম মাদারবাড়ি থেকে চামড়া নিয়ে আসা মো. রাসেল নামে এক মৌসুমী বিক্রেতা জানান, সকালে ৪০০ টাকা করে ২৪টি চামড়া বিক্রি করেছেন। তবে বিকাল হতে হতে সে দাম অর্ধেকে নামিয়ে দিয়েছেন আড়তদার প্রতিনিধিরা।

চৌমুহনী এলাকায় ঘুরে সত্যতা পাওয়া যায় রাসেলের কথার। বিভিন্ন জনের সাথে চামড়ার দরদার করতে দেখা যায় হাজী দুলাল নামে এ ব্যক্তিকে।

নিজেকে কাঁচা চামড়া আড়তদার সমিতির সাধারণ সম্পাদক মাহবুব হোসেনের প্রতিনিধি পরিচয় দেওয়া দুলাল জানান, সকালে তিনি চামড়া কিনেছিলেন ৩৫০-৪০০ টাকা দরে। তবে বিকালে নিচ্ছেন ২০০ টাকায়।

কয়েক ঘণ্টার ব্যবধানে অর্ধেক দাম কেন জানতে চাইলে তার দাবি, চামড়ার আকারের কারণে দামের এ হেরফের।

দুলাল বলেন, “সকালে যেসব চামড়া কেনাবেচা হয়েছিল সেগুলো শহরের, আর বিকালে বিভিন্ন গ্রাম থেকে চামড়া আনা হচ্ছে। সেগুলো আকারে ছোট হওয়ায় দাম কম।”

‘সিন্ডিকেট’ করে চামড়ার দাম কম দেওয়ার যে অভিযোগ মৌসুমী ব্যবসায়ীরা করছেন, তা আড়তদাররা অস্বীকার করছেন।

চট্টগ্রাম কাঁচা চামড়া আড়তদার ব্যবসায়ী সমবায় সমিতির সাধারণ সম্পাদক মাহবুব আলম কে বলেন, চামড়ার দাম কম হওয়ার জন্য ঢাকার ট্যানারি মালিকরা দায়ী। তাদের কাছে অনেক টাকা বকেয়া আছে চট্টগ্রামের আড়তদারদের। তাই কয়েকজন ছড়া বেশিরভাগ আড়তদার টাকার অভাবে চামড়া সংগ্রহ করতে পারছেন না।

তাদের সমিতির আওতাভুক্ত ১১২ জন সদস্য থাকলেও হাতেগোনা সাত থেকে আটজন আড়তদার চামড়া সংগ্রহ করছেন বলে দাবি করেন তিনি।

আড়তদাররা জানান, আগে চৌমুহনীসহ বিভিন্ন স্থানে আড়তদাররা চামড়া সংগ্রহের জন্য প্রতিনিধি পাঠালেও এবার তারা পাঠাননি। সরাসরি যারা তাদের কাছে চামড়া নিয়ে আসছেন শুধু তাদের কাছ থেকে চামড়া নেওয়া হচ্ছে।

মুরাদপুর এলাকায় গিয়ে দেখা যায়, বিভিন্ন স্থানে থেকে রিকশা, পিকআপ ও ভ্যানে করে চামড়া নিয়ে আসা হচ্ছে সেখানে। যাদের অনেকেই নিজ নিজ এলাকা থেকে সংগ্রহ করা চামড়া সরাসরি আড়তদারদের কাছে নিয়ে এসেছেন।

এএল লেদার নামে এক আড়তের ব্যবস্থাপক আইয়ুব আলী জানান, গতবারের মতো একই দামে তারা চামড়া সংগ্রহ করছেন। প্রতিটি চামড়া তারা কিনছেন তিন থেকে চারশ টাকায়। ঢাকার ট্যানারি মালিকরা তাদের বকেয়া টাকা পরিশোধ না করায় অনেকেই চামড়া সংগ্রহ করতে পারছেন না।

আড়তদাররা জানান, চট্টগ্রামে একসময় ২০টির বেশি ট্যানারি ছিল, এখন আছে দুটি। তার মধ্যে ইটিপি না থাকায় মদিনা ট্যানারির কার্যক্রম বন্ধ করে দিয়েছে পরিবেশ অধিদপ্তর। যার কারণে বেশ কয়েক বছরে ধরে এ ট্যানারির চামড়া সংগ্রহ করে না। এখন শুধু কার্যক্রম চালু আছে রীফ লেদার নামে একটি ট্যানারির।

এই ট্যানারির কাছে চট্টগ্রামের আড়তদাররা ৮০ হাজার থেকে এক লাখ চামড়া বিক্রি করে। বাকি চামড়া বিক্রির জন্য ঢাকার ট্যানারির ওপর নির্ভর করতে হয় বলে জানান তারা।

চট্টগ্রাম কাঁচাচামড়া আড়তদার ব্যবসায়ী সমবায় সমিতির সভাপতি মুসলিম উদ্দিন জানান, গতবারের মতো এবছরও চামড়া বিক্রি ভালো হচ্ছে।

তিনি বলেন, “আমরা বিভিন্ন স্থানে বলে দিয়েছি চামড়ায় লবণ দিয়ে রাখার জন্য। অনেকেই একাজ করছেন। যার কারণে চামড়া নষ্ট হওয়ার সম্ভাবনা নেই।”

চামড়ার দাম কম দেয়া নিয়ে অভিযোগের বিষয়ে জানতে চাইলে মুসলিম বলেন, “আমরা স্বাভাবিক দামেই চামড়া সংগ্রহ করছি। মৌসুমী ব্যবসায়ীরা এসব কথা সবসময় বলে থাকেন।”

 

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