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প্রচ্ছদ

সর্বশেষ খবর :

আদালতের নির্দেশেই ’বুড়িগঙ্গা’ নদী পারের স্থাপনা উচ্ছেদ-দখল

নিউজ ডেস্ক: একদিকে নদী দখল হচ্ছে, অন্যদিকে হাইকোর্ট থেকে দখলমুক্ত করার আদেশ দেওয়া হচ্ছে। এরপর শুরু হচ্ছে- উচ্ছেদ অভিযান। কয়েকদিন অভিযান চলার পর সবাই নীরব। তারপর আবারও দখল শুরু। নদী দখলমুক্ত করতে দীর্ঘদিন ধরেই চলছে কানামাছির মতো এরকম উচ্ছেদ উচ্ছেদ খেলা। নদী বিশেষজ্ঞরা ঢাকার চারপাশের নদী উদ্ধার কার্যক্রমকে এভাবেই দেখছেন। তারা বলছেন, লোক দেখানো উচ্ছেদের নামে সরকারের কোটি কোটি টাকা খরচ হচ্ছে; কিন্তু নদী তার জায়গা ফিরে পাচ্ছে না।

রাজধানী ঢাকার চারপাশের নদীগুলো যেমন- বুড়িগঙ্গা, তুরাগ, বালু, শীতলক্ষ্যা এসব নদীর দুইকূল ঘেঁষে অবৈধভাবে দখল করে গড়ে উঠেছে বিভিন্ন ব্যবসা প্রতিষ্ঠান। এ কারণে বুড়িগঙ্গা নদী ক্রমেই সঙ্কুচিত হচ্ছে, কমছে প্রশস্ততা। দখলের কারণে তুরাগ ও বালু নদী সরু খালে পরিণত হয়েছে। বুড়িগঙ্গার দুই পাড় দখল করে অনেক স্থানে চলছে ইট-বালুর জমজমাট ব্যবসা। রাজধানীর পোস্তগোলা আর শ্যামপুর এলাকার বুড়িগঙ্গার দু’পাড়ে দখলদাররা বিভিন্ন কায়দায় বিশাল এলাকা দখল করে গড়ে তুলছে ব্যবসা প্রতিষ্ঠান। আদি বুড়িগঙ্গার এখন আর অস্তিত্ব নেই। নদী দখল করে কামরাঙ্গীরচর এলাকা গড়ে উঠেছে।

ঢাকার হাজারীবাগ ও কামরাঙ্গীরচর এলাকায় বুড়িগঙ্গা ‘আদি চ্যানেল’ নদীর জায়গায় সিএস বা আরএস জরিপ অনুসারে চিহ্নিত ৭৪ স্থাপনা, মাটি ভরাট এবং দখল তিন মাসের মধ্যে উচ্ছেদ করতে গত ১৮ মার্চ নির্দেশ দিয়েছেন হাইকোর্ট। এ নির্দেশ অনুযায়ী গত ১৫ জুন রাজধানীর কামরাঙ্গীরচরের লোহারপুল এলাকা থেকে ব্যাটারি ঘাট পর্যন্ত অভিযান চালিয়ে এক তলা ভবনসহ ১০টি অবৈধ স্থাপনা উচ্ছেদ করা হয়। গতবছর ২২ নভেম্বর বুড়িগঙ্গা নদীর তীরে সদরঘাট এলাকায় বিআইডব্লিউটিএ অভিযান চালিয়ে ১৭০টি অবৈধ স্থাপনা উচ্ছেদ করেছিল। এতে নদীর তীরভূমির অন্তত তিন একর জমি উদ্ধার হয়েছিল। কিন্তু কিছুদিন যেতে না যেতেই এর অনেক জায়গা পুনরায় দখল হয়ে গেছে বলে এলাকাবাসীর অভিযোগ।

রাজধানীর পাশের চার নদী রক্ষায় পরিবেশ ও মানবাধিকার সংগঠন মামলা দায়ের করার পর আদালত ২০০৯ সালে এক রায় দেন। ওই রায়ে নদীকে জীবন্ত সত্ত্বা উল্লেখ করা হয়। এরপর ওই রায়ের প্রেক্ষিতে নদী রক্ষা কমিশন আইন করা হয় এবং ওই আইনের অধীনে নদী রক্ষা কমিশনও গঠন করা হয়। এই নদী রক্ষা কমিশন তার কার্যক্রমও শুরু করেছে। তবে তাদের সুপারিশ বাস্তবায়ন হচ্ছে না।

বাংলাদেশ অভ্যন্তরীণ নৌপরিবহন কর্তৃপক্ষ (বিআইডব্লিউটিএ) ঢাকার চারপাশের দখল হয়ে যাওয়া নদী উদ্ধারে যে ধারাবাহিক অভিযান চালাচ্ছে, তা নিয়ে অনেক অভিযোগ উঠেছে। অনেক প্রভাবশালী ব্যক্তির দখল বিআইডব্লিউটিএ মুক্ত করতে পারেনি। উল্টো নদীর সীমানা পিলার স্থাপন করে তারা অবৈধ দখলদারদের বৈধতা প্রদান করছে বলে পরিবেশবাদীরা বলছেন। রাজধানীর মোহাম্মদপুরের বছিলা সেতুর ওপারে নদীর তীর ঘেঁষে ঢাকা-১৪ আসনের সাবেক এমপি মরহুম আসলামুল হকের বিশাল সাম্রাজ্য। তার ‘আরিশা প্রাইভেট ইকোনমিক জোন’ ও ‘মায়িশা গ্রুপের পাওয়ার প্ল্যান্ট’ তুরাগ ও বুড়িগঙ্গার সংযোগস্থলের পাশে নদীর জায়গা দখল করে গড়ে উঠেছে।

কেরানীগঞ্জের ওয়াশপুর ও ঘাটারচর মৌজা এবং সাভারের শ্যামলাপুর মৌজার এই স্থাপনাকে অবৈধ চিহ্নিত করে গত বছরের মার্চ মাসে বিআইডব্লিউটিএ উচ্ছেদ অভিযান চালাতে গেলে বাধা দেন এমপি আসলাম। পরে তিনি আদালতের শরণাপন্ন হন। একই সঙ্গে তার প্রকল্পে থাকা জমি বুড়িগঙ্গা বা তুরাগের সীমানার মধ্যে পড়েছে কি-না, তা নির্ধারণ করতে জাতীয় নদী রক্ষা কমিশনের কাছে আবেদন করেন। অবৈধ দখল উচ্ছেদে পদক্ষেপ নেওয়ার জন্য ২০১৯ সালের ২৩ নভেম্বর বিআইডব্লিউটিএকে চিঠি দেয় কমিশন। তাদের প্রতিবেদন অনুযায়ী, আসলামুল হকের দখল করা জায়গার মধ্যে বুড়িগঙ্গা ও তুরাগতীর এবং বন্দরের সীমার জমি প্রায় ৮ একর এবং নদীর জমি প্রায় ১৩ একর। বাকি জমি ড্যাপের আওতাভুক্ত। আইনানুযায়ী নদীর মালিক জনগণ এবং নদী কমিশন এর অভিভাবক। কিন্তু বিআইডব্লিউটিএ নদী রক্ষা কমিশনের নির্দেশনা আমলে না নিয়ে, দখল করা নদী উদ্ধার না করে এককভাবে সীমানাখুঁটি বসাচ্ছে। আর এ সীমানাখুঁটি বসানোর মাধ্যমে দখলদারকে বৈধতা দেয়া হচ্ছে।

এ বিষয়ে জানতে চাইলে জাতীয় নদী রক্ষা কমিশনের সদস্য মনিরুজ্জামান গতকাল  বলেন, নদী রক্ষায় কমিশন সরকারকে বিভিন্ন নির্দেশনা দিচ্ছে। তবে সরকার সেগুলো যথাযথ বাস্তবায়ন করছে কি-না সে বিষয়ে তদারকি হচ্ছে না। আমাদের এ কমিশনের মেয়াদ প্রায় শেষ পর্যায়ে। এ ছাড়া চেয়ারম্যানও নতুন এসেছেন। করোনাকালীন কমিশনের কার্যক্রম এমনিতেই বন্ধ রয়েছে। দীর্ঘদিন কোনো বৈঠক হচ্ছে না। তাই কমিশনের নির্দেশনা অমান্য করে কোন কিছু হচ্ছে কি-না তা এখন জানা নেই। যদি হয় তাহলে সেটা অবশ্যই আত্মঘাতী হবে।

হিউম্যান রাইটস এন্ড পিস এর চেয়ারম্যান এডভোকেট মনজিল মোরসেদ এ বিষয়ে বলেন, নদী রক্ষায় সরকারের আন্তরিকতার কোনো বিকল্প নেই। জাতীয় নদী রক্ষা কমিশনের শুধুমাত্র নির্দেশনা দেওয়া ছাড়া আর কিছু করারর ক্ষমতা নেই। তাদের নির্দেশনা সরকারকেই বাস্তবায়ন করতে হবে। আদালত নদীরক্ষায় নির্দেশনা দিয়েছেন। এটা যথাযথ বাস্তবায়ন হয় কি-না সেটা আমরা দেখছি। বাস্তবায়ন না হলে আবার আদালতের কাছে যাব।

বাংলাদেশ পরিবেশ আন্দোলনের (বাপা) সাধারণ সম্পাদক শরিফ জামিল এ বিষয়ে বলেন, নদী রক্ষায় সরকার আন্তরিক নয়। সরকার যদি নদী রক্ষায় আন্তরিক হতো, তাহলে নদী এভাবে দখল হতো না। বিআইডব্লিউটিএ মাঝেমধ্যে লোক দেখানো উচ্ছেদ অভিযান চালায়। এতে ছোটোখাট দখলদারদের উচ্ছে করা হয়। কিন্তু বড় বড় প্রভাবশালী দখলদের কিছুই হয় না। উচ্ছেদের প্রক্রিয়ায় দেখা যায় ছোট সবজি ব্যবসায়ী ফুটপাতের দোকানদার ওদের উচ্ছেদ করা হয় দ্রুততার সাথে। কিন্তু কোনো বড় ফ্যাক্টরি বা বড় দখলদার উচ্ছেদের কোনো নজির তেমন দেখা যায়নি। তিনি বলেন, উচ্ছেদ অভিযানের নামে সরকারের কোটি কোটি টাকা খরচ করা হচ্ছে, অথচ নদী দখলমুক্ত হচ্ছে না। বরং নদী কমিশনকে অগ্রাহ্য করে বিআইডব্লিউটিএ সীমানাখুঁটি বসিয়ে দখলদারদের বৈধতা দিচ্ছে। এর পেছনে কী রহস্য আছে? এর আগে তুরাগ নদের সীমানাখুঁটি বসাতে গিয়েও বিআইডব্লিউটিএ একই কাজ করেছে। নদীর জায়গা বাইরে রেখে সীমানাখুঁটি বসিয়ে দখলদারদের দখল পাকাপোক্ত করে দিয়েছিল। আসলে সরকারের আন্তরিকতা ছাড়া নদীকে বাঁচানো সম্ভব নয়।

আদি বুড়িগঙ্গা চ্যানেল উদ্ধারে অবৈধ স্থাপনা উচ্ছেদে অভিযান আবারও শুরু হয়েছে। অভিযান পরিচালনা করছে ঢাকা জেলা প্রশাসন ও বিআইডব্লিউটিএ। গত ১৫ জুন রাজধানীর কামরাঙ্গীরচরের লোহারপুল এলাকা থেকে ব্যাটারি ঘাট পর্যন্ত অভিযান চালিয়ে এক তলা ভবনসহ ১০টি অবৈধ স্থাপনা উচ্ছেদ করা হয়। এ সময় আদি বুড়িগঙ্গা নদীর তীরে অবৈধভাবে গড়ে ওঠা টিনশেড বিভিন্ন স্থাপনা গুঁড়িয়ে দেয়া হয়। আদালতের নির্দেশ অনুযায়ী আদি বুড়িগঙ্গা চ্যানেল তীরে ৭৪টি অবৈধ স্থাপনার তালিকা অনুসারে এই উচ্ছেদ অভিযান পরিচালনা করা হচ্ছে বলে জানিয়েছে ঢাকা জেলা প্রশাসন।

পুরান ঢাকার সোয়ারীঘাটের কিছুটা পশ্চিমে চাঁদনীঘাট এলাকায় দু’ভাগে ভাগ হয়ে যাওয়া বুড়িগঙ্গার উত্তর দিকের শাখাটি আদি চ্যানেল হিসেবে পরিচিত আর দক্ষিণের শাখাটি এখনকার মূল বুড়িগঙ্গা। বুড়িগঙ্গার এই দুই ধারার মাঝখানে কামরাঙ্গীরচর, নবাবগঞ্জ চরসহ কয়েকটি এলাকার অবস্থান। কামরাঙ্গীরচর অংশের অল্প কিছু দূর ছাড়া এই চ্যানেলের পুরোটাই এখন ভরাট হয়ে গেছে। সেখানে গড়ে উঠেছে অসংখ্য বাড়ি-ঘর, বহুতল দালান ইত্যাদি অথচ দুই দশক আগেও এই চ্যানেলটি হাজারীবাগ, রায়েরবাজার ও মোহাম্মদপুরের পাশ দিয়ে আবারও বুড়িগঙ্গার সঙ্গে সংযুক্ত ছিল।

ঢাকার হাজারীবাগ ও কামরাঙ্গীরচর এলাকায় বুড়িগঙ্গা ‘আদি চ্যানেল’ নদীর জায়গায় সিএস বা আরএস জরিপ অনুসারে চিহ্নিত ৭৪ স্থাপনা, মাটি ভরাট এবং দখল তিন মাসের মধ্যে উচ্ছেদ করতে গত ১৮ মার্চ নির্দেশ দিয়েছেন হাইকোর্ট। ঢাকার জেলা প্রশাসক ও বিআইডব্লিউটিএর চেয়ারম্যানের প্রতি ওই নির্দেশ দেয়া হয়েছে। উচ্ছেদ কাজে সহযোগিতা করতে পুলিশের মহাপরিদর্শক, র‌্যাবের মহাপরিচালক ও ঢাকা মহানগর পুলিশ কমিশনারকে নির্দেশ দেয়া হয়েছে।

সূত্র: ইনকিলাব

 

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