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প্রচ্ছদ

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অনলাইন কেনাকাটায় প্রতারিত ১১.৪৮ শতাংশ : পুরুষ ৭.৩৮ শতাংশ, নারী ৩.৬৯ শতাংশ

নিউজ ডেস্ক: ফেসবুকের ‘শপিং ক্রাউড’ নামের পেজে চমকপ্রদ বিজ্ঞাপনে আকৃষ্ট হয়ে আগাম টাকা পরিশোধের মাধ্যমে চারটি শার্টের অর্ডার দেন বগুড়ার ইউসুফ আলী। কিন্তু নির্ধারিত সময়ের মধ্যে শার্ট বুঝে না পাওয়ায় যোগাযোগ করতে গিয়ে তিনি দেখেন মোবাইল ফোন নম্বর ব্লক এবং ফেসবুক পেজও খুঁজে পাওয়া যাচ্ছে না।

ইউসুফ আলীর মতো লাখো মানুষ অনলাইন কেনাকাটায় প্রতারণার শিকার হচ্ছে। করোনাকালে দেশে তথ্য-প্রযুক্তির ব্যবহারের সঙ্গে সমান্তরাল হারে বেড়েছে সাইবার অপরাধও। দেশে করোনা সংক্রমণ শুরু হয় গত বছর। ওই বছরই ই-কমার্সে পণ্য কিনতে গিয়ে প্রতারণার শিকার হয়েছে ১১ শতাংশের বেশি মানুষ। আগের বছর এই সংখ্যা ছিল ৭.৪৪ শতাংশ। অর্থাৎ এক বছরের ব্যবধানে এ ধরনের অপরাধ বেড়েছে প্রায় ৪ শতাংশ।

সাইবার ক্রাইম অ্যাওয়ারনেস ফাউন্ডেশনের (সিসিএ ফাউন্ডেশন) ‘সাইবার ক্রাইম ট্রেন্ড ইন বাংলাদেশ ২০২০’ শীর্ষক বার্ষিক গবেষণা প্রতিবেদনে এ তথ্য উঠে এসেছে। প্রতিবেদনটি আজ শুক্রবার প্রকাশ করা হবে।

গবেষণা প্রতিবেদনের তথ্যানুযায়ী, গত বছর সারা দেশে যত ধরনের সাইবার অপরাধ হয়েছে, তার মধ্যে ১১.৪৯ শতাংশই অনলাইনে পণ্য কিনতে গিয়ে প্রতারণার ঘটনা। প্রতারিত হওয়া ব্যক্তিদের মধ্যে সবচেয়ে বেশি ৯.৮৫ শতাংশের বয়স ১৮ থেকে ৩০ বছর। আর ০.৯২ শতাংশের বয়স ১৮ বছরের কম।

গবেষণা প্রদিবেদনে দেখা গেছে, পুরুষরাই অনলাইন কেনাকাটায় বেশি প্রতারণার শিকার হয়েছে। প্রতারিতদের মধ্যে পুরুষ ৭.৩৮ আর নারী ৩.৬৯ শতাংশ।

সংশ্লিষ্ট ব্যক্তিরা বলছেন, বাস্তব জীবনে ঘটমান অপরাধগুলো এখন ডিজিটাল মাধ্যমে স্থানান্তরিত হচ্ছে।

অনলাইনের বাড়তি চাহিদা দেখে অনেক ভুঁইফোড় অনলাইন, ফেসবুক পেজ থেকে পণ্য বিক্রির কথা বলে প্রতারণা করা হচ্ছে। অনলাইনে যে পণ্যের ছবি আছে, বাস্তবে সেটি সরবরাহ করা হচ্ছে না। আবার পণ্যের ই-পেমেন্ট নিয়ে ডেলিভারি দেওয়া হচ্ছে না।

নিয়ন্ত্রক সংস্থা বাংলাদেশ টেলিরেগুলেটরি কমিশনের (বিটিআরসি) পরিসংখ্যান অনুযায়ী, চলতি বছরের মার্চে দেশের মোট মোবাইল ফোন সংযোগের সংখ্যা ছিল ১৭ কোটি ৪৬ লাখ ৩০ হাজার। এ সময় দেশে ইন্টারনেট ব্যবহারকারীর সংখ্যা ছিল ১১ কোটি ৬১ লাখ ৪০ হাজার।

ব্যক্তিপর্যায়ে ভুক্তভোগীদের মধ্যে জরিপ চালিয়ে দেখা গেছে, ২০২০ সালে দেশে সাইবার অপরাধের মধ্যে জেঁকে বসেছে ফোনে বার্তা পাঠিয়ে হুমকি দেওয়ার ঘটনা। বায়োমেট্রিক পদ্ধতিতে সিম নিবন্ধনের পরও এই মাধ্যমে হুমকি দিচ্ছে অপরাধীরা। একই সঙ্গে নতুন যুক্ত হয়েছে কপিরাইট আইন লঙ্ঘন, পণ্য বিক্রি করতে গিয়ে প্রতারণা এবং অনলাইনে কাজ করিয়ে নেওয়ার কথা বলে প্রতারণা।

গবেষণা দলে যুক্ত সিসিএ ফাউন্ডেশনের এক কর্মকর্তা নাম প্রকাশ না করার শর্তে বলেন, ‘করোনা পরিস্থিতিতে মানুষ সশরীরে পণ্য কেনার চেয়ে অনলাইনে ঝুঁকেছে বেশি। যার কারণে সাধারণ ক্রেতারা বিচার বিবেচনা করার সুযোগ পায়নি। কোনটি ভেরিফায়েড পেজ আর কোনটি ভুয়া। অফার দেখা যাচ্ছে এক রকম, কেনার পর দেখা যাচ্ছে আরেক রকম। দেশে কোনো নীতিমালা না থাকায় ই-কমার্স খাতে নৈরাজ্য চলছে। তিনি বলেন, ‘আমরা এসংক্রান্ত আইনি কাঠামো করার সুপারিশ করেছি গবেষণা প্রতিবেদনে, যাতে নীতিমালায় সরবরাহ করা পণ্যের প্যাকট খুলে দেখে তারপর দাম পরিশোধের বিষয়টি বাধ্যতামূলক করা হয়।’

ই-কমার্স অ্যাসোসিয়েশন অব বাংলাদেশের (ই-ক্যাব) সভাপতি শমী কায়সার বলেন, ‘আমরা ই-কমার্স খাতের প্রবৃদ্ধি দেখেছি মূলত করোনাকালে। করোনার আগে প্রবৃদ্ধি ছিল ২০-২৫ শতাংশ। কিন্তু করোনাকালে এই খাতের প্রবৃদ্ধি হয়েছে ৭০-৮০ শতাংশ। গত আট মাসে আমাদের ১৬ হাজার কোটি টাকার লেনদেন হয়েছে। এখন এই মুহূর্তে আমাদের প্রতিদিন এক লাখ ৬০ হাজারের বেশি ডেলিভারি হচ্ছে।’

অনলাইন কেনাকাটায় অপরাধ বাড়ছে কেন জানতে চাইলে ই-কমার্স অ্যাসোসিয়েশন অব বাংলাদেশের (ই-ক্যাব) সাধারণ সম্পাদক মো. আব্দুল ওয়াহিদ তমাল গতকাল বলেন, ‘করোনাকালে হঠাৎ করে অনেকেই ই-কমার্স ব্যবসায় এসেছে। অনেকেই নিয়ম-নীতি না মেনে ব্যবসা করছে। অনেকের ট্রেড লাইসেন্সও নেই। শুধু ফেসবুক পেজ দিয়ে পণ্যের অর্ডার নিচ্ছে। অনেক কুরিয়ার কম্পানি আছে যাদের লাইসেন্স নেই কিন্তু এই ব্যবসা করছে। আইন বা নীতিমালা হলে এই খাতে সুশাসন প্রতিষ্ঠা হবে বলে আশা করি। আমাদের সদস্যসংখ্যা দেড় হাজার। এর বাইরেও চার-পাঁচ লাখ ক্ষুদ্র উদ্যোক্তা আছে। তাদের মনিটরিং করা খুবই কঠিন।’

সিসিএ ফাউন্ডেশন বলছে, সাইবার অপরাধের প্রতিকারবিষয়ক আইন সম্পর্কে জানে না বেশির ভাগ মানুষ। দেশে একটি স্বাস্থ্যকর সাইবার সংস্কৃতি গড়ে তুলতে এবং সাইবার অপরাধ নিয়ন্ত্রণে সচেতনতার বিকল্প নেই। সচেতনতাই সাইবার সুরক্ষার অনন্য হাতিয়ার। এ বিষয়ে ব্যক্তিপর্যায় থেকে শুরু করে গণমাধ্যমকর্মী, আইন-শৃঙ্খলা রক্ষাকারী বাহিনী, প্রযুক্তি সেবাদাতা প্রতিষ্ঠান, আইনজীবী, বিচারকসহ সবার সমান গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা রয়েছে।

অনলাইন কেনাকাটায় প্রতারণার শিকার হলে কী করবেন, সে পরামর্শ দিয়ে ব্যারিস্টার মিতি সানজানা বলেন, প্রতারণার শিকার হলে দেওয়ানি ও ফৌজদারি দুই ধরনের মামলাই করতে পারে যে কেউ। ভোক্তা অধিকার আইন এবং ১৮৭২ সালের কন্ট্রাক্ট আইনে প্রতিকার পেতে পারে। এ ছাড়া দ্য সেল অব গুডস অ্যাক্ট রয়েছে। – কালের কণ্ঠ

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