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প্রচ্ছদ

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হাওরে পানি নেই, নেই জেলেদের ঈদও

নিউজ ডেস্ক: ‘হাওরে পানি না থাকলে, আমার মতো জেলেদের কোরবানি ঈদে সেমাই কিনে খাওয়া পর্যন্ত কঠিন হয়ে যায়। এখন পানিও নাই বলে হাওরে জাল ফেলে মাছও ওঠে না। তাই, আমাদের ঈদও নাই।’ কথাগুলো বলছিলেন মৌলভীবাজারের হাকালুকি হাওর পাড়ের জেলে মনসুর আলী। বর্ষা মৌসুম হাওরের মাছ আহরণের উপযুক্ত সময় হলেও, এবার হাওরে পানি না থাকায় মাছই পাননি তিনি।

 তিনি জানান, মাছ ধরে সাত জনের পরিবারের খরচ চালাতে হয় তাকে।

তিনি বলেন, ‘আমার জমিজমা নেই। আয়ের উৎস হলো মাছ। নদীতে মাছ না পেলে, কষ্টের শেষ থাকে না। এখন বড় কষ্টে দিনাতিপাত করছি।’

কুলাউড়া উপজেলার ভুকশিমইল এলাকার অবসরপ্রাপ্ত সরকারি কর্মকর্তা সাজ্জাদ হোসেন জানান, টাটকা মাছ কিনতে প্রতি বছর তিনি হাওরে যান। বছরের এ সময়ে (জুন-জুলাই মাসে) হাকালুকি হাওর পানিতে পূর্ণ হয়ে তার সত্যিকারের রূপ নেয়। কিন্তু, এবার চলতি বর্ষা মৌসুমে হাওর অনেকটাই জলশূন্য। এতে করে জীবিকা সংকটে পড়েছেন হাকালুকি পাড়ের মৎস্যজীবীরা।

স্থানীয় মৎস্য বিভাগের সংশ্লিষ্টদের ধারনা, চলতি বছরে বৃষ্টিপাত কম হওয়ায় ও উজানের পানি না নামায় হাওর পানিতে পরিপূর্ণ হয়নি।

সরেজমিনে হাকালুকির মৌলভীবাজারের কুলাউড়া অংশের ইসলামপুর বাজার এলাকায় গিয়ে দেখা যায়, হাওরের খাল, বিল ও জলাশয়ে কিছুটা পানি আছে। বাকি হাওরের বিস্তীর্ণ এলাকা এখনো শুকনো।

শিকারে বের হয়ে মাছ না পেয়ে বাজারের আঙিনায় বসে লুডো খেলছেন স্থানীয় মৎস্যজীবী শাহয়ুব আলী, আজমত আলী, তয়জুল ইসলামসহ কয়েকজন।

সিলেটের ফেঞ্চুগঞ্জ এলাকাতেও গিয়ে দেখা যায় একই চিত্র। বর্তমানে নদী শুকিয়ে যাওয়ায় ঘাট আছে কিন্তু নৌকা চলে না। ঘাটে বাঁধা আছে নৌকাগুলো।

ঘাটের মাঝি আব্দুস ছামাদ ও আনোয়ার হোসেন  জানালেন, অনেক জায়গা এখনো শুকনো, নৌকা চালান যায়না। তাই, নৌকা বেঁধে রাখা হয়েছে।

ইসলামপুর বাজার এলাকার জেলে শাহয়ুব আলী, আজমত আলী, তয়জুল ইসলামসহ একাধিক মৎস্যজীবী জানান, এর আগে কোনো বছর এমন হাকালুকি হাওর তারা দেখেননি। বৈশাখ মাস থেকে বিল, খাল ভরে গিয়ে হাওর জুড়ে পানি থাকতো। কিন্তু, আষাঢ় মাস শেষের দিকে এখনো হাওরের খাল বিলে পানি ঠিকমতো হয়নি।

‘নৌকা নিয়ে সকালে বের হয়েছি। বিকেল পর্যন্ত জাল দিয়ে খালে মাছ ধরার চেষ্টা করেছি। বড় মাছতো দূরের কথা। পাঁচ জন মিলে এক কেজি ছোট মাছও ধরতে পারিনি,’ জেলে শাহয়ুব আলী বললেন।

তারা জানান, অন্যান্য বছর সকাল থেকে দুপুর পর্যন্ত হাওরে জাল দিয়ে কম হলেও ছোট বড় ১৫ থেকে ২০ কেজি মাছ ধরতে পারতেন। বিকেলে সেটা আবার বিভিন্ন বাজারে বিক্রি করে পাঁচ থেকে ছয় হাজার টাকা পাওয়া যেত। নৌকা ও জালের মালিককে ভাড়া দিয়ে জনপ্রতি পাঁচশ থেকে ছয়শ টাকা থাকত।

এখন রোজগার তো দূরের কথা, নৌকার মহাজনকে ভাড়া পর্যন্ত দিতে পারছেন না তারা।

মৎস্য ব্যবসায়ী শাহিদুর রহমান বলেন, ‘আমরা হাওরের জেলেদের থেকে মাছ কিনে নিয়ে বিক্রি করি। দুপুর থেকে অপেক্ষা করছি। যারা এসেছেন তাদের কেউ কেউ সামান্য মাছ ধরতে পারলেও অনেকেই মাছ পাননি। আমাদেরও খালি হাতে ফিরে যেতে হবে। এমন দিন আসবে ভাবিনি।’

মৎস্যজীবী ইলাই মিয়া, বয়তুল আলী, রেনু মিয়া বলেন, ‘আষাঢ় মাসেও হাওরে পানি কম। নৌকা নিয়া হাওরে গিয়ে খালি হাতে ফিরতে হয়। শুধু খালে মাছ ধরতে পারছি। বিলে নৌকা নিয়ে নামলে ইজারাদারদের পাহারাদাররা জাল নৌকা আটকে রাখেন। টাকা দিয়ে জাল ও নৌকা ছাড়িয়ে আনতে হয়।’

মৎস্যজীবী নওয়াব মিয়া ও ইয়াকুব আলী বলেন, ‘হাওর ভরে রাস্তাঘাটে পানি থাকত বর্ষায়। বিল, খাল ভরাট হয়ে যাচ্ছে। আগে হাওরজুড়ে বছরের ছয়-সাত মাস পানি থাকত। এখন বছরের তিন মাসও হাওরে পানি থাকে না। হাকালুকিতে মাছ ধরে জীবন চালানো কষ্টকর হয়ে পড়েছে।’

জানতে চাইলে কুলাউড়া উপজেলা মৎস্য কার্যালয়ের সিনিয়র কর্মকর্তা মোহাম্মদ আজহারুল আলম বলেন, ‘চলতি বছর বৃষ্টিপাত কম হওয়ায়, হাকালুকি হাওরে বর্ষায়ও পানি অনেক কম। খাল-বিলের পানিতে মাছ ধরতে হচ্ছে। বিস্তীর্ণ হাওরজুড়ে পানি থাকলে জেলেরা কাঙ্ক্ষিত মাছ পেতেন।’

‘ইলিশের বংশবিস্তারে দেশের বরিশাল, চাঁদপুরসহ বিভিন্ন এলাকায় মাছের প্রজননকালে মাছ ধরা নিষিদ্ধ থাকায়, ওই অঞ্চলের জেলেদের নির্দিষ্ট সময় সরকারি ত্রাণ সহায়তা দেওয়া হয়। হাওরাঞ্চলে এরকম মাছ ধরার নিষেধাজ্ঞা নেই। তাই এরকম কোন ত্রাণ আসেনা,’ যোগ করেন তিনি।

যোগাযোগ করা হলে ঢাকা মৎস্য অধিদপ্তরের ইলিশ সম্পদ উন্নয়ন ও ব্যবস্থাপনা প্রকল্পের সহকারী পরিচালক সুলতান মাহমুদ মোবাইলে  বলেন, ‘হাকালুকির নদী ও খাল দিয়ে পলিমাটি এবং বালি এসে খাল-বিল ভরাট হয়ে যাচ্ছে। মৎস্য সম্পদের জোগানদাতা হাকালুকি হাওরে অন্যান্য বছর এপ্রিল মাস থেকে পানি থাকত। গত কয়েক বছর হাওরে ইলিশেরও দেখা মিলেছে।’

এ বছর পর্যাপ্ত বৃষ্টি না হওয়ায় হাওরে পানি কম উল্লেখ করে তিনি বলেন, ‘এতে হাওরের মৎস্য সম্পদ ও জেলেদের জীবিকাও সংকটে পড়বে।’

তিনি বলেন, ‘এপ্রিল-মে মাসে মাছের প্রজননকাল। হাওরে ওই সময় মাছ ধরা বন্ধ থাকলে মাছের প্রজনন বৃদ্ধি পাবে। চলতি বছরের জানুয়ারিতে আমি মন্ত্রণালয়ের সচিবের কাছে হাওরের মৎস্য সম্পদের প্রজনন বৃদ্ধির জন্য প্রজননকালে মাছ ধরা বন্ধ ও ওই সময় বেকার থাকা মৎস্য বিভাগের আওতাধীন জেলেদের ত্রাণ সহায়তা প্রদানের জন্য প্রস্তাবনা জমা দিয়েছি। বিষয়টি তিনি গুরুত্ব সহকারে নিয়েছেন।’

‘প্রস্তাবনা বাস্তবায়িত হলে হাকালুকির বিলুপ্তপ্রায় দেশীয় মাছ বৃদ্ধি পাবে। জেলেদের জীবিকা প্রাণ ফিরে পাবে,’ বলেন তিনি। – দ্য ডেইলি স্টার

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