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প্রচ্ছদ

সর্বশেষ খবর :

করোনা: টেলিমেডিসিনেও সেবা মিলছে না

কালের কণ্ঠ: ‘প্রিয় গ্রাহক, জাতীয় স্বাস্থ্যসেবার কলসেন্টার স্বাস্থ্য বাতায়ন ১৬২৬৩-তে আপনাকে স্বাগতম। আমাদের সবগুলো লাইন এই মুহূর্তে ব্যস্ত আছে। আমাদের একজন ডাক্তার শীঘ্রই আপনার কলটি রিসিভ করবেন। ততক্ষণ পর্যন্ত অনুগ্রহপূর্বক অপেক্ষা করুন।’

মোবাইল ফোনে স্বাস্থ্যসেবার (টেলিমেডিসিন) সরকারি কলসেন্টারে বারবার ফোন করে অন্য প্রান্ত থেকে এমন বার্তা শুনতে পাচ্ছিলেন রাজধানীর মোহাম্মদপুরের বাসিন্দা সাগর আহমেদ (৪৫)। বাসায় তাঁর স্ত্রী করোনায় আক্রান্ত। পরিবারের আরো দুজনের আছে করোনার লক্ষণ। হাসপাতালে ভর্তি হতে না পেয়ে বাসায় থেকেই তাঁর স্ত্রী চিকিৎসা নিচ্ছেন। কিন্তু জরুরি প্রয়োজনে তিন দিন ধরে তিনি অন্তত আটবার ফোন করেও সংযোগ পাননি। একবার আধাঘণ্টার বেশি অপেক্ষা করেও ডাক্তারকে পাননি। ক্ষুব্ধ সাগর হোসেনের প্রশ্ন, ‘শীঘ্রই মানে কতক্ষণ? বিপদের সময় যদি ডাক্তার না পাওয়া যায়, তাহলে এই সেবা থেকে লাভ কী?’

সাগর আহমেদের মতে, হাজারো মানুষ ২৪ ঘণ্টার স্বাস্থ্যসেবার এই প্ল্যাটফর্ম থেকে সেবা নিতে গিয়ে সমস্যায় পড়ছে। সহজেই চিকিৎসা পরামর্শ পাওয়ার আশায় বারবার কল করে অপেক্ষায় থাকতে থাকতে লোকজনের মোবাইল ফোনের ব্যালান্স ফুরাচ্ছে, কিন্তু সেবা মিলছে না। স্বাস্থ্য বাতায়নে কল করে প্রতি মিনিটে ৬০ পয়সা করে খরচ হয় গ্রাহকের।

করোনা মহামারির কঠিন সময়ে ব্যাপকভাবে সংক্রমণ বাড়ায় অক্সিজেন এবং হাসপাতালে নিবিড় পরিচর্যা কেন্দ্রের (আইসিইউ) শয্যাসংকট দেখা দিয়েছে। চিকিৎসাসেবা পেতে দীর্ঘ সময় ধরে অপেক্ষা করতে হচ্ছে। এত সংকটের মধ্যেও করোনার প্রথম ঢেউয়ে ভরসা হিসেবে কাজ করেছে সরকারের টেলিমেডিসিন সেবা স্বাস্থ্য বাতায়নসহ (১৬২৬৩) আরো কয়েকটি কলসেন্টার।

করোনা শনাক্ত হলেও যাদের উপসর্গ মারাত্মক নয়, তাদের বাসায় থেকে টেলিমেডিসিন সেবা নিতে পরামর্শ দেওয়া হয়। এ রকম একজন ৪৫ বছর বয়সী আব্দুল গনি। মুগদা হাসপাতাল থেকে যাত্রাবাড়ীতে বাসায় ফেরত নিয়ে যান ছেলে সাব্বির আহমেদ। তিনি বলেন, ‘বাবার করোনা শনাক্ত হলেও কোনো মারাত্মক উপসর্গ না থাকায় চিকিৎসকরা তাঁকে বাসায় থেকে জাতীয় স্বাস্থ্যসেবার ১৬২৬৩ নম্বরে ফোন দিয়ে চিকিৎসা গ্রহণের পরামর্শ দিয়েছেন। কিন্তু ফোন করে নাজেহাল হচ্ছি, সময়মতো সেবা পাচ্ছি না।’

বর্তমানে স্বাস্থ্য বাতায়ন ছাড়াও ‘৩৩৩’ এবং জাতীয় রোগতত্ত্ব, রোগ নিয়ন্ত্রণ ও গবেষণা প্রতিষ্ঠানের (আইইডিসিআর) হটলাইন ১০৬৫৫ নম্বরে স্বাস্থ্যসেবা পেতে কল করছেন অনেকেই। হটলাইনে স্বাস্থ্যসংক্রান্ত পরামর্শ পেতে ফোনকলের ৭০ শতাংশ করোনাসংক্রান্ত। হটলাইনের নম্বরগুলোতে ২৪ ঘণ্টা স্বাস্থ্যসেবা দেওয়ার জন্য চুক্তিভিত্তিক চিকিৎসক নিয়োজিত আছেন। কিন্তু চিকিৎসকসংকটে এসব কলসেন্টারে সেবা নিতে দীর্ঘ সময় অপেক্ষা করতে হচ্ছে।

৩৩৩ নম্বর হটলাইনটি পরিচালনা করে এটুআই (অ্যাকসেস টু ইনফরমেশন) প্রকল্প। তারা জানায়, করোনাকালের আগে প্রতিদিন এই নম্বরে গড়ে ৩০ হাজারের মতো কল আসত। কিন্তু করোনাকালে হেল্পলাইনটিকে টোল ফ্রি করে দেওয়ার ফলে এখন প্রতিদিন লক্ষাধিক কল আসছে। তবে জনবলের স্বল্পতা ও কিছু অবাঞ্ছিত কলের কারণে প্রায়ই সেবা ব্যাহত হচ্ছে। এই সেবার ভেন্ডর হিসেবে আছে জেনেক্স ইনফো।

২০০৬ সালে ই-হেলথ সেবা চালু করে সিনেসিস আইটি লিমিটেড। ২০১৫ সালে সরকারের সহযোগিতায় প্রতিষ্ঠানটির ওয়ানস্টপ সার্ভিস স্বাস্থ্য বাতায়নের (১৬২৬৩) যাত্রা শুরু হয়। এই নম্বরে ফোন করে জনগণ ২৪ ঘণ্টা চিকিৎসা পরামর্শ, কাউন্সেলিং, বিশেষজ্ঞ চিকিৎসকের তথ্য এবং জরুরি অ্যাম্বুল্যান্স সেবা গ্রহণ করতে পারে। পাশাপাশি চিকিৎসাসংক্রান্ত কোনো অভিযোগ থাকলে সেটাও করতে পারে এই নম্বরে।

সূত্র জানায়, করোনা শুরুর পর থেকে চলতি ৫ জুলাই পর্যন্ত শুধু স্বাস্থ্য বাতায়ন ১৬২৬৩ থেকে টেলিমেডিসিন সেবা নিয়েছে এক কোটি ৭৩ লাখ ৬৪ হাজার ২৫১ জন। এসব কলের মধ্যে ৭০ শতাংশ চিকিৎসা ও পরামর্শ নিয়েছে। এর মধ্যে ২০২০ সালে কল এসেছিল এক কোটি ৯ লাখ ৭৮ হাজার ৩৩২টি। ২০২১ সালের জানুয়ারি থেকে ৫ জুলাই পর্যন্ত কল এসেছে ১৬ লাখ ৫২ হাজার ৭০১টি। এর মধ্যে গত মে মাসে কল এসেছে এক লাখ ৫০ হাজার ৫৯১টি, জুন মাসে তা বেড়ে এক লাখ ৮৯ হাজার ৯৬৫টিতে দাঁড়িয়েছে। চলতি জুলাই মাসের প্রথম পাঁচ দিনেই কল এসেছে ৪৫ হাজার ২৭৪টি। যে হারে করোনা রোগী শনাক্ত বাড়ছে, আগামী সপ্তাহখানেকের মধ্যে কলের চাপ অন্তত পাঁচ গুণ বাড়তে পারে।

সূত্র জানায়, লকডাউন চলাকালে জাতীয় স্বাস্থ্যসেবার কলসেন্টারে ফোন করে সেবা নেওয়ার হার আরো বেড়েছে। সেটা দিন দিন বাড়ছে। এমন পরিস্থিতি সামাল দিতে বাড়তি চিকিৎসকের অনুমোদন চেয়ে গত ২৫ জুন স্বাস্থ্য অধিদপ্তরে চিঠি দিয়েছে সিনেসিস আইটি। চিঠিতে প্রতিষ্ঠানটি লিখেছে, ‘দেশে বর্তমানে যে গতিতে সংক্রমণের হার বাড়ছে, তাতে গত বছরের প্রথম ঢেউয়ের মতো কলের চাপ বাড়তে পারে। এই সেবার মান ঠিক রাখতে অধিক ডাক্তার প্রয়োজন।’

গ্রাহক ভোগান্তির কারণ জানতে চাইলে সিনেসিস হেলথের প্রধান নির্বাহী পরিচালক ও জনস্বাস্থ্য বিশেষজ্ঞ ডা. নিজাম উদ্দিন আহমেদ গতকাল মঙ্গলবার বলেন, ‘করোনার ঊর্ধ্বগতিতে কলের চাপ বাড়ছে। কল লোড যেহেতু অনেক বেশি, তাই অপেক্ষার সময়ও বেড়ে যাচ্ছে। গত রবিবার এক দিনে স্বাস্থ্য বাতায়নে প্রায় সাড়ে ১৬ হাজার কল এসেছে। বিকেলে হঠাৎ করে ডাক্তার বাড়াতে হলো। একজন ডাক্তার প্রতি শিফটে ১০০টি কল ধরতে পারেন। এখন ৬০ জন ডাক্তার দায়িত্ব পালন করছেন। যত বেশি ডাক্তার আমরা পাব, তত দ্রুত সংযোগ পাওয়া যাবে।’ তিনি বলেন, ‘করোনার প্রথম ঢেউয়ে আমাদের দিনে ৪০০ জন পর্যন্তও ডাক্তার দিয়ে আমরা দুটি সেন্টার পরিচালনা করেছি। এখন যে হারে কল আসছে, তাতে লাগবে ন্যূনতম ২০০ ডাক্তার। কিন্তু আমাদের আছে ৬০ জন, যা দিয়ে আমরা চাপ সামলাতে পারিছ না।’

ডা. নিজাম উদ্দিন আহমেদ বলেন, তাঁর ধারণা আগামী দুই সপ্তাহের মধ্যে কল দিনে ৮০ থেকে ৯০ হাজারে চলে যাবে। সে ক্ষেত্রে ৩০০-৩৫০ চিকিৎসক ও ৫০ জন স্বাস্থ্যবিষয়ক তথ্য কর্মকর্তা দরকার।

ডা. নিজাম আরো বলেন, গত বছর যখন চাপ বেড়ে গিয়েছিল, তখন স্বাস্থ্য অধিদপ্তরের সার্বিক সহযোগিতায় ও নির্দেশনায় চিকিৎসকের সংখ্যা দ্রুত বাড়ানো হয়েছিল। ফলে সাফল্যের সঙ্গে তাঁরা সেবা দিতে সক্ষম হয়েছিলেন। এরপর পরিস্থিতির উন্নতি হওয়ার সঙ্গে কলসংখ্যা বিবেচনায় চিকিৎসকের সংখ্যা কমানো হয়েছে। তবে বর্তমান পরিস্থিতিতে আবার চিকিৎসক বাড়ানোর প্রয়োজনীয়তা দেখা দিয়েছে। স্বাস্থ্য অধিদপ্তরকে এ বিষয়ে চিঠি দেওয়ার কথা জানিয়ে তিনি বলেন, ‘দ্রুত ব্যবস্থা নেওয়া হবে বলে আমরা আশা করছি।’

তথ্য ও যোগাযোগ প্রযুক্তি বিভাগের সিনিয়র সচিব এন এম জিয়াউল আলম গতকাল বলেন, ‘এখন করোনা বেড়ে যাওয়ায় প্রচুর কল হচ্ছে। ডাক্তারের সংখ্যা কমে যাওয়ায় সমস্যা হতে পারে। সেবাটির উন্নয়ন চলমান প্রক্রিয়া। ডাক্তার বাড়ানোর জন্য আমরা স্বাস্থ্য অধিদপ্তরকে বলব। মানুষ এখন মোবাইলের মাধ্যমে স্বাস্থ্যসেবায় অভ্যস্ত হচ্ছে। ভবিষ্যতে করোনা না থাকলেও এসব সেবা নাগরিকদের জন্য চালু রাখতে হবে।’

স্বাস্থ্য অধিদপ্তরের অতিরিক্ত মহাপরিচালক (প্রশাসন) অধ্যাপক ডা. নাসিমা সুলতানা গতকাল বলেন, ‘এই সেবাটি স্বাস্থ্য অধিপ্তর বেসরকারি খাত থেকে প্রতিযোগিতামূলক টেন্ডারের মাধ্যমে কিনে নিয়ে পরিচালনা করছে। তাদের জায়গা থেকে কোনো দুর্বলতা থাকলে আমরা দেখব। পাশাপাশি এই সেবার পরিধি আরো বাড়ানোর জন্য নতুন করে টেন্ডার প্রক্রিয়া চলছে।’

স্বাস্থ্য অধিদপ্তরের ম্যানেজমেন্ট ইনফরমেশন সিস্টেম (এমআইএস) বিভাগ ডিজিটাল স্বাস্থ্যসেবার হটলাইন কার্যক্রমের সমন্বয়ক। এই শাখার পরিচালক ডা. মিজানুর রহমান গতকাল বলেন, ‘মানুষের কেন সংযোগ পেতে দেরি হচ্ছে সেটা খোঁজ নিয়ে দেখব। ডাক্তারের সংখ্যা বাড়ানো হয়নি। বাড়ানো যায় কি না আমরা দেখব।’

এটুআই প্রকল্পের ন্যাশনাল কনসালট্যান্ট (ল্যান্ড ইনোভেশন) গোলাম মোহাম্মদ ভূঁইয়া গতকাল বলেন, ‘করোনা সংক্রমণের ঊর্ধ্বগতির কারণে বর্তমানে ৩৩৩ নম্বরে স্বাস্থ্যসেবা নিতে প্রচুর কল আসছে। অনেকে তথ্যের জন্যও ফোন করেন। কখনো চাপ বাড়ে, কখনো কমে—এসব সামাল দিয়েই আমাদের চলতে হচ্ছে। মানুষকে যাতে লম্বা সময় অপেক্ষ করতে না হয়, তার জন্য সেবাটির উন্নয়নে ভিন্ন বিজনেস মডেলে যাওয়ার বিষয়টিও আমরা চিন্তা করছি। আগামী মার্চ থেকে আরো আধুনিক প্রযুক্তি প্রবর্তনের পরিকল্পনা আমাদের আছে।’

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