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প্রচ্ছদ

সর্বশেষ খবর :

মেঘনার ভাঙন রোধে বড় বাজেট হলেও আতংক কাটছে না লক্ষ্মীপুরের ৭ লাখ মানুষের

রামগতি-কমলনগর প্রতিনিধি : মেঘনা নদীর ভাঙনের কবল থেকে রক্ষা পেতে পানি উন্নয়ন মন্ত্রনালয় একনেক বড় অংকের বাজেট পেশ করেন।এবং বাজেট বড় অংকে অনুমোদন হয়। কিন্তু বাজেট অনুমোদন হলে কি হবে..। কবে হবে কাজ..! এমন আতংকে দিন কাটাচ্ছে মেঘনা নদীর ভাঙন কবলিত ৭ লক্ষ মানুষের।

বিগত ৩০ বছরে মেঘনা নদীর ধারাবাহিক ভাঙনে লক্ষ্মীপুরের রামগতি ও কমলনগর উপজেলার প্রায় ২৪০ বর্গকিলোমিটার এলাকা বিলীন হয়ে গেছে। এর মধ্যে শুধু গত ১০ বছরেই মেঘনায় বিলীন হয়েছে ১৭০ বর্গকিলোমিটার এলাকা। এ সময় ভিটেমাটি হারিয়ে বাস্তুচ্যুত হয়েছেন প্রায় লক্ষাধিক বাসিন্দা।

গত ১০ বছরের ভাঙনের হার পূর্বের ১০ বছরের তুলনায় বেড়েছে প্রায় ৩ গুণ।

ভাঙন ঠেকাতে বাঁধ নির্মাণের জন্য গত ১ জুন তারিখে ৩ হাজার ৮৯ কোটি ৯৭ লাখ টাকার একটি প্রকল্প অনুমোদন দিয়েছে জাতীয় অর্থনৈতিক পরিষদের নির্বাহী কমিটি (একনেক)। কিন্তু বড় প্রকল্পটি অনুমোদন পেলেও পূর্বের আরেকটি প্রকল্পের অভিজ্ঞতার কারণে এলাকার বাসিন্দারা শঙ্কায় রয়েছেন।

এমন পরিস্থিতিতে ভাঙন কবলিত মেঘনাপার এলাকায় প্রকল্প নির্ধারিত সময়ে সেনাবাহিনীর মাধ্যমে স্থায়ী ও টেকসই বাঁধ নির্মাণের দাবি করছেন এলাকাবাসী। অন্যদিকে, নদী ভাঙনের শিকার হতে পারেন, এমন লোকদের আগাম তথ্য সংগ্রহ করে তথ্যব্যাংক গড়ে প্রয়োজনীয় ও কার্যকর ব্যবস্থা গ্রহণ করার পরামর্শ দিয়েছেন বিশ্লেষকরা।

বড় প্রকল্প অনুমোদন হওয়ার পরেও এলাকাবাসী কেন শঙ্কায়- এ বিষয়ে কয়েকজনের সঙ্গে কথা হয়। এলাকার বাসিন্দা সাংবাদিক সাজ্জাদ রহমান জানান, ২০১৪ সালের ৫ আগস্ট একনেকের বৈঠকে উক্ত এলাকায় ৩৭ কিলোমিটার বাঁধ নির্মাণে ১,৩৫০ কোটি টাকার একটি প্রকল্পের অধীনে প্রথম পর্যায়ে ১৯৮ কোটি টাকা অনুমোদন দিয়েছিল একনেক। ২০১৪ সাল থেকে শুরু হওয়া প্রকল্পটি ২০১৯ সালের জুন মাসে শেষ করার সময়সীমা নির্ধারণ ছিল। কিন্তু প্রকল্পের প্রথম পর্যায়ে ১৯৮ কোটি টাকা ব্যয়ে দুই উপজেলায় সাড়ে পাঁচ কিলোমিটার বাঁধ নির্মাণ শেষ হয় ২০১৭ সালের মার্চ মাসে।

এরপর কোনো কারণ ছাড়াই পুরো প্রকল্পটি বাতিল হয়ে যায়। সেখানে সেনাবাহিনী দিয়ে নির্মিত সাড়ে চার কিলোমিটার বাঁধ ভালোভাবে তৈরি হয়। কিন্ত একই সময়ে ঠিকাদার দিয়ে তৈরি করা ১ কিলোমিটার বাঁধে ৮ বার ধস নামে। অন্যদিকে, প্রকল্প চলাকালীন সময়েও বহু এলাকা নদীতে বিলীন হয়ে যায়।

মোহাম্মদ আজাদ নামে আরেকজন জানান, প্রকল্পটি বাতিল হওয়ার পর ২০১৭ সাল থেকে এলাকাবাসী আবারও দাবী দাওয়া নিয়ে মাঠে নামেন। সেই প্রেক্ষিতে চলতি জুন মাসে পূর্বের ১,৩৫০ কোটি টাকার স্থলে বর্তমানে ৩,০৮৯ কোটি টাকা অংকে প্রকল্পটি অনুমোদন পায়।

এবার স্থানীয়দের আশঙ্কা, প্রকল্পের কিছু অংশ বাস্তবায়নের পর যদি আগের মতো প্রকল্পটি বিশ্রাম নেয় বা বাতিল হয়ে যায়? আবার বর্তমান প্রকল্পটি যদি সেনাবাহিনী দিয়ে না করানো হয়, তবে তা আগের ১ কিলোমিটারের মতোই মানহীন হওয়ার আশঙ্কা রয়েছে।

রামগতি উপজেলার বালুর চর গ্রামের গৃহহীন আছিয়া খাতুন জানান, গত ২ বছর ধরে ভাঙনের পাশাপাশি নতুন সমস্যা দেখা দিয়েছে নদীতে অস্বাভাবিক জোয়ার। চলতি বছর আরেকটি নতুন সমস্যা দেখা দিয়েছে- জোয়ারের পানিতে অতিরিক্ত লবণাক্ততা।

স্থানীয়ভাবে জানা যায়, লক্ষ্মীপুর সদর ও কমলনগর উপজেলার পশ্চিম সীমানার উত্তর-দক্ষিণ এবং রামগতি উপজেলার পশ্চিম ও দক্ষিণ বরাবর মেঘনা নদী বহমান। কমলনগরে মেঘনার দৈর্ঘ্য ১৭ এবং রামগতিতে ২০ কিলোমিটার। দুই উপজেলার ৩৭ কিলোমিটার মেঘনা নদীর কূল প্রতিনিয়ত ভাঙছে। ভাঙনের ইতিহাস ও নানা তথ্য উপাত্ত থেকে দেখা যায়, বিগত সময়ের তুলনায় গত ১০ বছরে মেঘনা নদী ভাঙনের হার তিনগুণ বেড়েছে।

১৯৯১ সালের আদমশুমারি প্রতিবেদনে সাবেক রামগতি (রামগতি-কমলনগর) উপজেলার আয়তন ছিল ৬৬৩ বর্গকিলোমিটার। ২০ বছর পর ২০১১ সালের আদমশুমারি প্রতিবেদনে সে আয়তন উল্লেখ করা হয় ৫৯৪ বর্গকিলোমিটার। তাতে দেখা যায়, ২০ বছরে মেঘনায় বিলীন হয়ে গেছে ৬৯ বর্গকিলোমিটার। ২০১১ সালের পর আর কোনো আদমশুমারি হয়নি। এর মধ্যে এ অঞ্চলে নদী ভাঙনের গতি ভয়াবহ আকার ধারণ করেছে।

ভাঙন কবলিত ইউনিয়ন পরিষদ চেয়ারম্যান আনোয়ার হাজ্বি হারুনুর রশি জানিয়েছেন, ভাঙনের তীব্রতায় গত ৫ বছরেই বিলীন হয়েছে কমলনগর উপজেলার ৪ ইউনিয়ন পরিষদের ১৫টি ওয়ার্ড। ভূমি অফিসের দেওয়া তথ্যে জানা যায়, সেগুলোতে মোট ভূমি ছিল ৭০ বর্গকিলোমিটার। বর্তমানে ভাঙছে কমলনগর উপজেলার ৬ ইউনিয়নের ১৬টি ওয়ার্ড, রামগতি উপজেলার ৬ ইউনিয়ন ও একটি পৌরসভার ৩৪টি ওয়ার্ড এবং সদর উপজেলার একটি ইউনিয়নের ২টিসহ মোট ৫০টি ওর্য়াড। প্রত্যেকটি ইউনিয়নের ভূমি অফিসের পৃথক তথ্যে দুই উপজেলার আংশিক ভাঙা ওয়ার্ডগুলোতে প্রায় ১০০ বর্গকিলোমিটার এলাকা নদীতে বিলীন হয়ে গেছে।

সংশ্লিষ্ট ইউনিয়ন ভূমি অফিস এবং চেয়ারম্যানদের দেওয়া তথ্য ও সরেজমিনে হিসেবে করে দেখা যায়, গত ৩০ বছরের প্রথম ২০ বছরে ৭০ বর্গকিলোমিটার এবং পরের ১০ বছরে এ দুই উপজেলায় আরও ১৪০ বর্গকিলোমিটারসহ মোট ২৪০ বর্গকিলোমিটার এলাকা নদীতে বিলীন হয়েছে।

ভাঙনে বিলীন এবং ভাঙন কবলিত এলাকার চেয়ারম্যানদের দেওয়া তথ্য অনুসারে, কমলনগরের সাহেবেরহাট ইউনিয়নে ৩০ হাজার, চর কালকিনিতে ১৫ হাজার, পাটারিরহাট ইউনিয়নে ১৫ হাজার, চর ফলকন ইউনিয়নে ৫ হাজার, চর মার্টিন ও চর লরেঞ্চ ইউনিয়নে ৫ হাজার অধিবাসী ভিটে-মাটি হারিয়েছেন। অন্যদিকে, রামগতি উপজেলার বড়খেরী ইউনিয়নে ১০ হাজার, চর আলেকজান্ডার ইউনিয়নে ১০ হাজার, চর আবদুল্লাহ ইউনিয়নে ১০ হাজার অধিবাসী তাদের ভিটে হারিয়েছেন।

কমলনগর উপজেলার চর কালকিনি ইউনিয়ন পরিষদের চেয়ারম্যান মাস্টার ছাইয়েফ উল্লাহ জানান, দুই উপজেলার মাঝ বরাবর বয়ে যাওয়া লক্ষ্মীপুর-রামগতি সড়ক। এ সড়ক থেকে ১৯৯০ সালে পশ্চিম দিকে মেঘনা নদীর দূরত্ব ছিল প্রায় ১৫ কিলোমিটার। ২০০৬ সালে কমলনগর উপজেলা গঠনকালে মেঘনার দূরত্ব ছিল ১৩ কিলোমিটার। কিন্ত বর্তমানে একই সড়ক থেকে মেঘনা নদীর গড় দূরত্ব ৩ কিলোমিটার।

উপজেলার সাহেবেরহাট ইউনিয়নের চেয়ারম্যান আবুল খায়ের জানান, গত ১০ বছরের তার ইউনিয়নের ৮টি ওর্য়াড বিলীন হয়ে এখন ১টি ওয়ার্ডের আর কয়েক একর জমি বাকি রয়েছে। ভাঙনে সাহেবেরহাট ইউনিয়নের প্রায় ৩০ হাজার লোক বাস্তুচ্যুত হয়েছেন।

পাটারিরহাট ইউনিয়নের চেয়ারম্যান ও উপজেলা আওয়ামীলীগের চেয়ারম্যান অ্যাডভোকেট নুরুল আমিন রাজু জানান, তার ইউনিয়নের ৩টি পূর্ণাঙ্গ ওয়ার্ড বিলীন, আরও ৩টি ভাঙছে। ভাঙনের শিকার হয়ে প্রায় ১৫ হাজার মানুষ ঘর-বাড়ি হারিয়েছেন।

রামগতি উপজেলা যুবলীগের আহ্বায়ক মেজবাহ উদ্দিন হেলাল জানান, গত ১০ বছর আগে উপজেলার প্রশাসনিক এলাকা আলেকজান্ডার থেকে দক্ষিণ দিকে মেঘনার দূরত্ব ছিল ১৫ কিলোমিটার; এখন ২০০ মিটার। রামগতি বাজার থেকেও মেঘনা ছিল ১০ কিলোমিটার দক্ষিণে; এখন বাজারের সঙ্গেই নদী।

রামগতির চর আবদুল্লাহ ইউনিয়নের চেয়ারম্যান কামাল হোসেন জানান, তার ইউনিয়নের ৯টি ওয়ার্ডই নদীতে ভাঙছে। বড়খেরী ইউনিয়নের চেয়ারম্যান হাছান মাকসুদ মিজান জানান, তার ইউনিয়নের ৭টি ওয়ার্ড প্রায় বিলীনের পথে। সেখানকার প্রায় ১০ হাজার মানুষ বাস্তুচ্যূত হয়েছেন। আলেকজান্ডার ইউনিয়নের ৭টি ওয়ার্ডের প্রায় ১০ হাজার মানুষ বাস্তুচ্যুত হয়েছেন। সদর উপজেলার চর রমনী মোহন ইউনিয়নের চেয়ারম্যান ইউছুপ ছৈয়াল জানান, নদী ভাঙা মানুষের জন্য যে আশ্রয়ণ প্রকল্প গ্রহণ করা হয়েছে, তার ইউনিয়নের ৪নং ওয়ার্ডে তেমন একটি আশ্রয়ণ প্রকল্প ভাঙনের হুমকিতে পড়েছে।

চর আলেকজান্ডার ইউনিয়নের বালুরচর গ্রামে ভাঙা বেড়িবাঁধের ওপর কথা হয় মুর্শিদা বেগম (৫০) নামে এক নারীর সঙ্গে। তিনি জানান, এ পর্যন্ত ৮ বার নদী ভাঙনের শিকার হয়েছেন। ভাঙনের কারণে সকল স্বজন হারিয়েছেন। এখন তার স্বজন বলতে কেউ নেই; প্রতিবেশীরাই স্বজন।

কমলনগরে আকতার হোসেন (৩১) জানান, গত ইয়াস ঘূর্ণিঝড়ের পরের দিনের জোয়ারে তার ঘর ভেঙে গেছে। বাড়ির অর্ধেক নদীতে ভেঙে গেছে। এখন কোথায় যাবেন, জানেন না তিনি।

কী কারণে মেঘনায় হঠাৎ করে এত ভয়াবহ ভাঙন দেখা দিয়েছে, স্থানীয়ভাবে কেউই তা জানাতে না পারলেও তথ্য নিয়ে জানা যায়, রামগতি কমলনগরের কিছু এলাকায় আগে মাটির বেড়িবাঁধ ছিল। ২০০৭ সালের প্রলয়ঙ্করী ঘূর্ণিঝড় আইলার আঘাতে বাঁধের ৩৭ কিলোমিটার মেঘনা নদীতে বিলীন হয়ে যায়। এরপর সে বাঁধ আর তৈরি করা সম্ভব হয়নি। এরপর লোকালয়ে জোয়ারের পানি ঢুকে ব্যাপকহারে নদীর তীর ভাঙছে

পরিবেশ ও জলবায়ু বিষয়ক সংগঠক চেঞ্চ ইনেশিয়েটিভের নির্বাহী পরিচালক এবং পরিবেশ ও জলবায়ু বিশ্লেষক এম. জাকির হোসেন খান বলেন, নদী ভাঙনের শিকার হতে পারেন- এমন লোকদের আগাম তথ্য সংগ্রহ করে তথ্যব্যাংক গড়ে ভাঙনের শিকার লোকদের জন্য অবশ্যই প্রয়োজনীয় সহযোগিতার পদক্ষেপ নিতে হবে। তিনি যোগ করেন, ভিটে-মাটি হারা লোকেরা আশ্রয়ের ও কর্মের জন্য শহরমুখী হবেন, যা উন্নয়নশীল বাংলাদেশের জন্য বোঝা হবে।

এ বিশ্লেষক পরামর্শ দেন, নদী এলাকায় শুধু মাটির পরিবর্তে সকল বাঁধই কমপক্ষে ৫০ মিটার দৈর্ঘ্যের জিওব্যাগের উঁচু বাঁধ দেওয়া। অন্যদিকে, সারা বছর নদী ভাঙনের শিকার হতে যাওয়া এলাকার নিখুঁত তথ্য সংগ্রহ ও পর্যবেক্ষণের জন্য রেডক্রিসেন্ট এবং ঘূর্ণিঝড় প্রস্তুতি কর্মসূচীর স্বেচ্ছাসেবকদের কাজে লাগানোর পরামর্শ দেন তিনি।

কমলনগর-রামগতি আসনের সংসদ সদস্য মেজর (অব) আবদুল মান্নান জানিয়েছেন, দুই উপজেলার নদী ভাঙন রোধ করতে একটি প্রকল্প তৈরি করা হয়েছে। ‘আশা করি, সে প্রকল্পের মাধ্যমে নদীর তীর রক্ষা করা সম্ভব হবে।

লক্ষ্মীপুর পানি উন্নয়ন বোর্ডের নির্বাহী প্রকৌশলী ফারুক আহমেদ বলেন, ‘জেলার ৪টি উপজেলা উপকূলীয় হলেও রামগতি এবং কমলনগরে ব্যাপক হারে নদী ভাঙছে।

তিনি জানান, জেলার দুটি উপজেলার ৩১ কিলোমিটার মেঘনা নদীর তীর রক্ষা বাঁধ নির্মাণের একটি প্রকল্প জাতীয় অর্থনৈতিক পরিষদের নির্বাহী কমিটির (একনেক) সভায় অনুমোদন পেয়েছে। অর্থছাড় পেলে শিগগিরই কাজ শুরু করা যাবে।

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