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প্রচ্ছদ

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মাস্ক না পরলে কী ঘটে, সেটা মনে করিয়ে দেওয়ার জন্যই এই লকডাউন: ড. আতিউর রহমান

আমিরুল ইসলাম: বাংলাদেশ ব্যাংকের সাবেক গভর্নর ড. আতিউর রহমান বলেন, করোনা সংক্রমণের বর্তমান অবস্থায় কঠোর লকডাউন ছাড়া বিকল্প কোনো সুযোগ ছিলো না। প্রত্যেক দেশেরই খানিকটা কষ্ট ও দুর্ভোগ মেনে নিতে হচ্ছে, আমাদেরও নিতে হবে। ব্যবসায়ীদেরও কিছুটা ক্ষতি মেনে নিতে হবে। কারণ করোনা সংক্রমণ নিয়ন্ত্রণে আনতেই হবে। করোনা সংক্রমণ নিয়ন্ত্রণের উপায় দুটি ভ্যাকসিনেশন আর মাস্ক। বেশির ভাগ মানুষকে ভ্যাকসিনেশনের আওতায় নিয়ে আসতে হবে। মাস্ক পরতেই হবে। যখন দুটোর একটিও থাকে না তখন লকডাউন দিতে হয়।

যেকোনো কারণেই হোক, দেশে মাস্ক পরার সংস্কৃতিটা সেভাবে গড়ে ওঠেনি। আমরা সেটা গড়ে তুলতে পারিনি। যদি সবাই মাস্ক পরতাম, তাহলে পরিস্থতি এতোটা খারাপ হতো না। সবাইকে মাস্ক পরতে বাধ্য করার জন্য এরকম একটি সময় বেছে নেওয়া হয়েছে। যেহেতু মানুষজন মাস্ক পরেন না, সেহেতু রাস্তায়ও বের হতে পারবেন না। মাস্ক না পরলে কী ঘটে, সেটা মনে করিয়ে দেওয়ার জন্যই এই লকডাউন।

এ প্রতিবেদকের সঙ্গে আলাপকালে তিনি বলেন, দেশে এখনো খুব বেশি মানুষকে টিকা দেওয়া হয়নি। কিন্তু জুলাই মাস থেকে নিয়মিত টিকা প্রদানের জন্য নানা উদ্যোগ নেওয়া হয়েছে। যেহেতু শতকরা ৫০ শতাংশ লোককেও টিকা দিতে না পারায় আমাদের সামনে লকডাউন দেওয়া ছাড়া আর কোনো পথ খোলা নেই। এখন দেখতে হবে লকডাউটি যেন সহনীয় হয়। লকডাউনকে সহনীয় রাখার জন্য অনেক কিছু খোলা রাখা হয়েছে। শিল্পকারখানা, কাঁচাবাজার, রেস্তোরাঁ, জরুরি সেবা, গণমাধ্যম ও ত্রাণবিতরণসহ অনেকগুলো ছাড় দেওয়া হয়েছে। শুধু জনসমাগম ঘটে এমন প্রতিষ্ঠানগুলো বন্ধ রাখার চেষ্টা করা হয়েছে। সরকার যথেষ্ট ভেবেচিন্তেই এমন একটি উদ্যোগ নিয়েছে, যাতে করে জীবন এবং জীবিকা দুটোকেই সামলানো যায়।

লকডাউন সফল করতে সাধারণ মানুষ ও সমাজেরও দায়িত্ব আছে। আমরা সবাই যদি মাস্ক পরতাম ও স্বাস্থ্যবিধি মেনে চলতাম তাহলে পরিস্থিতি কিছুতেই এতোটা খারাপ হতো না। সেজন্য কঠোর লকডাউন দিয়ে সাধারণ মানুষকে একটি ধাক্কা দেওয়ার চেষ্টা করা হয়েছে। এই লকাডাউন খুব শক্তভাবে পালন করা হবে এবং সাধারণ মানুষ কেউ এই লকডাউন মানতে হবে। সামনে ঈদুল আজহা থাকায় একেবোরে ঈদের কাছাকাছি সময়ে শুরু না করে আরও কিছুদিন পূর্বে এই কঠোর লকডাউন দিলে ভালো হতো। কারণ ঈদের মধ্যে সরকার না চাইলেও কিছু মানুষ অস্থির হয়ে পড়বে। কোরবানি গরুর হাটের ওপর এর প্রভাব কিছুটা পড়বে।

তবে এবার ব্যবসায়ীরা অনলাইনে গরু ক্রয় করবে বেশি। হাটে না গিয়ে সবাই গরু ক্রয় করার চেষ্টা করবে। তারপরও শেষ দিকে সপ্তাহখানেক সময়ের জন্য সবকিছু খোলা থাকতে পারে। দুই সপ্তাহ শক্তভাবে লকডাউন পালন করতে পারলে করোনা পরিস্থিতি অনেকটাই সামাল দেওয়া যাবে। করোনাভাইরাস অনেকটা নিয়ন্ত্রণে চলে আসতে পারে। এ সময়ে মাস্ক পরা ও স্বাস্থ্যবিধি মানার জন্য প্রচার খুব বাড়াতে হবে। সরকার টিকার ব্যবস্থা করার চেষ্টা করছে। এটাকে আরও বেশি তরান্বিত করতে হবে। প্রধানমন্ত্রী শেখ হাসিনা বলেছেন, টাকা যতোই লাগুক, আমরা টিকার ব্যবস্থা করবো। প্রধানমন্ত্রীর এরকম বক্তব্য জাতিকে আশ^স্ত করেছে।

করোনায় গ্রামীণ অর্থনীতি ক্ষতিগ্রস্ত হওয়ার আশঙ্কা এখনো তেমনভাবে দেখা দেয়নি। কারণ সীমান্তবর্তী নির্দিষ্ট কিছু গ্রামে করোনাভাইরাসের সংক্রমণ বেশি, সব গ্রামে নয়। এখনো পর্যন্ত করোনার আক্রমণ বেশির ভাগ শহরেই হচ্ছে। ছোট ছোট শহর, বড় শহরসহ যেখানে ঘনবসতি রয়েছে সেখানে করোনা সংক্রমণ হচ্ছে। একেবারে গ্রামের ভেতর রোগী তেমন বেশি দেখা যাচ্ছে না। একেবারে গ্রাম থেকেই রোগী আসছে না। যারা শহরে বা উপ-শহরে থাকে তাদের মধ্য থেকে সংক্রমিত হচ্ছে। ধান ওঠে গেছে, অন্যান্য সবজিও উৎপাদন হয়ে গেছে। গ্রামীণ অর্থনীতির একটি বড় সমস্যা হচ্চে বাজারজাতকরণে। কিন্তু লকডাউনে বিপণন বা বাজারজাতকরণের কোনো কিছু বন্ধ করতে বলেনি। সরকার গ্রামীণ অর্থনীতিকে আরও চাঙা করতে চাইলে কৃষকরা যেন খোলাবাজারে তাদের পণ্য বিক্রি করতে পারেন, তার ব্যবস্থা করতে হবে। একইসঙ্গে সরকারই তাদের পণ্য ক্রয় করে তাদের চাহিদা চাঙা রাখতে হবে।

পুলিশলাইন, হাসপাতাল, জেলখানা এসব জায়গাতে উন্নত মানের সবজি, মাছ গ্রামীণ বাজার থেকে ক্রয় করে দিয়ে বাজারটা যেন চাঙা রাখে। কৃষকদের কাছে পণ্য কিনে নিয়ে সরকার ত্রাণও দিতে পারে। এই সময়ে যারা অভুক্ত থাকবে তাদের ত্রাণ বিতরণের সঙ্গে কৃষকদের সবজি ক্রয় করে নিয়ে দেওয়া যায়, আম ক্রয় করে নিয়ে তাদের দেওয়া যায়। কৃষকের পণ্যের চাহিদা বজায় রাখার জন্য ইনোভেটিব হতে হবে। কৃষকদের পণ্যের চাহিদা যেন কমে না যায়, আমাদের সেটা খেয়াল করতে হবে।

তিনি বলেন, লকডাউনের কারণে খানিকটা ক্ষতি তো হবেই। প্রধানমন্ত্রীও বলেছেন, ১৭ বিলিয়ন ডলারের ক্ষতি ইতিমধ্যে আমাদের অর্থনীতির হয়ে গেছে। সুতরাং এই লকডাউনেও আমাদের আরও কিছু ক্ষতি হবে। কিন্তু এই ক্ষতিটা বৃহত্তর কল্যাণে আমাদের মেনে নিতে হবে। যখন আমরা করোনাকে পরাস্থ করতে পারবো তখন অর্থনীতি খুব খাড়াখাড়িভাবে ওপরের দিকে উঠে যাবে। তখন সেটা মেকআপ হয়ে যাবে। সরকার ৩৩৩ নামে হাঙ্গার হটলাইনের যে ভালো উদ্যোগ নিয়েছে, সেটা যেন চালু থাকে। এই হটলাইনটা যেন আরও বেশি করে সচল থাকে। এই সময়ে অনেক কিছু বন্ধ থাকায় মানুষ না খেতে পেয়ে এই হটলাইনে কল করবে তখন যেন খুব তাড়াতাড়ি তাদের কাছে খাবার পৌঁছে যায়। ৩৩৩ হটলাইনের দিকে সরকারের বেশি করে নজর দিতে হবে।

কঠোর লকডাউনে সরকার যে সমস্ত নির্দেশনা দিয়েছে সেটা ভেবেচিন্তেই একটা বিচক্ষণ নির্দেশনা দিয়েছে। প্রতিষ্ঠান খোলা রাখা, না রাখার ব্যাপারে সরকার জীবন-জীবিকা দুটোকেই সামলানোর চেষ্টা করেছে। তারপরেও অর্থনীতির খানিকটা ক্ষতি হবে, কিন্তু করোনাভাইরাস নিয়ন্ত্রণে আনতে পারলে এই ক্ষতি পুষিয়ে নিতে খুব বেশি সময় লাগবে না। সম্পাদনা : রেজা

 

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