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প্রচ্ছদ

সর্বশেষ খবর :

[১] চা স্টলের গল্প থেকে হত্যা মামলার রহস্য উদঘাটন করলো পিবিআই

সুজন কৈরী: [২] নড়াইলের লোহাগড়া থানায় ২০১৬ সালের ১৮ ফেব্রুয়ারি দায়ের করা একটি মামলার রহস্য জেলখানায় করা গল্পের সূত্র ধরে উদঘাটন করেছে পুলিশ ব্যুরো অব ইনভেস্টিগেশন (পিবিআই)। নড়াইলের আদালত পাড়ায় এক চা স্টলে জেলখানার গল্প শোনে সেটিকে ক্লু হিসেবে ধরে মামলার রহস্য উদঘাটন করেন তদন্ত কর্মকর্তা।

[৩] গত বৃহস্পতিবার পিবিআই প্রধান ডিআইজি বনজ কুমার মজুমদার তার নিজের ফেসবুকে আইডিতে দেওয়া পোস্টের মাধ্যমে চাঞ্চল্যকর এই হত্যা মামলার রহস্য উদঘাটনের বিষয় তুলে ধরেন।

[৪] পোস্টে তিনি জানান, মামলার তদন্ত কর্মকর্তা নড়াইল আদালত পাড়ায় একটি চা স্টলে বসে চা পান করছিলেন। চা দোকানি তার দোকানে যাওয়া বিভিন্ন আসামিদের কাছ থেকে শোনা জেলাখানায় থাকার গল্প বলছিলেন। ভিড় কমতেই কথার ছলে চা দোকানিকে পিবিআই কর্মকর্তা জিজ্ঞাসা করেন নির্ধারিত এলাকার কোনও খুনের বিষয়ে কখনো শুনেছেন কি না। প্রায় তিন বছর আগের ঘটনা, তাও দোকানদার স্মৃতি হাতড়ে এক জামিন পাওয়া আসামির গল্পের কথা বলেন দোকানি।

[৫] ওই চা দোকানি জানান, তার দোকানে সেই আসামি তার জেলখানার জীবনের একটি গল্প বলেছিলেন। সেই গল্পের সঙ্গে মিলে যায় তদন্তকারী কর্মকর্তার মামলার রহস্য।

[৬] ফেসবুক পোস্টে পিবিআই প্রধান আরও জানান, নড়াইলের লোহাগড়ার নোয়াগ্রামের আমিরুল ইসলাম টনিক ভাগ্যান্বেষণে দীর্ঘদিন মধ্যপ্রাচ্যে ছিলেন। ভালো অর্থ উপার্জন করে দেশে ফিরে স্থায়ী হয়েছেন বাড়িতে। ব্যবসা করবেন বলে ১৮ লাখ টাকা দিয়ে একটি গাড়ি কেনেন। ব্যবসার উন্নতি দেখে আরও একটি গাড়ি কেনার জন্য ব্যাংক থেকে নেন ১২ লাখ টাকা। যেদিন টাকা তুলেন ওইদিন রাতে নিজের পাকা বাড়িতে টনিক নিশ্চিন্তে ঘুমিয়ে ছিলেন। আচমকা হালকা শব্দে তার ঘুম ভেঙে যায়। এর মধ্যেই ‘তুই এখানে কি করিস’ বলে কাউকে তাড়া করে বাইরে নিয়ে যান। আদতে জানালার গ্রিল কেটে চোর ঢুকেছিল বাড়িতে। সেই চোরকেই তাড়া করেন টনিক। তবে কিছুক্ষণ পর টনিককে খুঁজে পাওয়া গেল কিছুটা দূরে। তিনি মাথায় মারাত্মক জখম নিয়ে রক্তাক্ত অবস্থায় মাটিতে পড়ে আছেন।

[৭] ব্যাটারিচালিত অটোরিকশায় করে তাকে জেলা হাসপাতালে নেওয়া হয়। সেখান থেকে উন্নত চিকিৎসার জন্য তাকে পাঠানো হয় খুলনায়। আহত টনিককে তার মা জিজ্ঞাসা করেন ‘চোর তো মনে হয় চিনেছ, কে এমন সর্বনাশ করল।’ আহত টনিকের উল্টো জবাব ছিল ‘আগে ঘরে ফিরি। তারপর দেখো কি করি।’ কিন্তু দীর্ঘ ১৮ দিন চিকিৎসকদের সব চেষ্টা বিফল করে টনিক মারা যান। শোকসন্তপ্ত পরিবারের পক্ষে থানায় খুনের মামলা দায়ের করেন টনিকের চাচাতো ভাই লাবু শেখ। খুনি-চোররা সবাই অজ্ঞাত। ২০১৬ সালের ১৮ ফেব্রুয়ারি নড়াইলের লোহাগড়া থানায় দায়ের করা মামলাটি প্রায় দুই বছর বিভিন্ন সংস্থা ঘুরে তদন্তভার যায় পিবিআইতে।

[৮] নড়াইলে পিবিআইয়ের কোনো কার্যালয় না থাকায় মামলার তদন্ত কার্যক্রম যশোর থেকেই পরিচালিত হয়। দায়িত্বপ্রাপ্ত তদন্ত কর্মকর্তার কাছে শুধু এতটুকুই তথ্য চোর টনিকের পরিচিত হতে পারে, আর এ ভরসায় এদিক-সেদিক দৌড়াদৌড়ি করেন তিনি।

[৯] কোনোভাবেই রহস্যের কুলকিনারা করতে না পারা তদন্ত কর্মকর্তা একদিন বিশ্রামের জন্য আদালত পাড়ার একটি চায়ের দোকানে বসেন। তদন্ত কর্মকর্তা কী মনে করে দোকানদারকে জিজ্ঞেস করেন তিন বছর আগের লোহাগড়ার কোনো খুনের বিষয়ে এখানে কোনো গল্প শুনেছেন কি না। দোকানদার স্মৃতি হাতড়ে বলার চেষ্টা করেন, কোনো এক মামলার আসামি আদালতে হাজিরা দিতে এসে মাঝে-মধ্যে তার দোকানে চা খেতেন। সেই আসামি একদিন সতীর্থ একজনকে কথার ছলে বলেছিলেন, জেলখানায় থাকাকালীন সেখানকার এক চোরের গল্প। সেই চোর চুরি করার সময় গৃহকর্তা তাকে চিনে ফেলায় হাতে থাকা দা দিয়ে কোপ মারে। কোপ খেয়েও তাকে তাড়া করে প্রায় ধরে ফেলেছিলেন। সে ভয় পেয়েছে আর কখনও চুরি করবে না বলে ভেবেছে।

[১০] চা দোকানির গল্পকে পুঁজি করেই ছুটতে থাকেন তদন্ত কর্মকর্তা। অনেক খোঁজাখুঁজির পর জেলখানার জামিনপ্রাপ্ত চা দোকানে গল্প করা সেই ব্যক্তিকে পাওয়া যায়। তার বাড়ি অন্যত্র হলেও আনা হয় যশোরে, সে কোনোভাবেই টনিকের খুনের সঙ্গে জড়িত নয়। তবে জেলকর্মীদের সাহায্য নিয়ে শনাক্ত করা হয় তার গল্পের সেই চোরকে। সে অন্য একটি মামলায় জেলে আছেন ও নাবালক। তদন্ত দল আবিষ্কার করে এ হাজতি টাবু শেখ টনিকের আপন চাচাতো ভাই এবং মামলার বাদী লাবু শেখের আপন ভাই।

[১১] পিবিআই প্রধান তার দেওয়া পোস্টে জানান, টাবু শেখকে খুঁজে পেয়ে তদন্তে গোলমাল বেঁধে যায়। সন্দেভাজন টাবু শেখ নাবালক হওয়ায় তার রিমান্ড আর পাওয়া যায় না। ওদিকে লাবু শেখ তদন্তে অসহযোগিতা শুরু করেন। নিহত টনিকের মা ধাঁধায় পড়ে যান। তিনি আদালতে গিয়ে বলেন, তার ছেলে হত্যায় পিবিআই শুধু শুধু তার পরিবারের লোকজনকে ফাঁসাচ্ছে। তদন্ত কর্মকর্তা অন্য পন্থা অবলম্বন করতে থাকেন। খুঁজে বের করা হয় টাবু শেখের বন্ধু-বান্ধবদের। একে একে গ্রেপ্তার করা হয় চারজনকে। যারা সবাই আদালতে স্বীকার করেন, টনিকের ব্যাংক থেকে উঠানো ১২ লাখ টাকার জন্যই টাবু শেখসহ টনিকের ঘরে ঢুকেছিলেন।

[১২] আলমারি খোলার শব্দে টনিক জেগে যায় এবং আবছা আলোতে টাবুকে দেখে চিনে ফেলেন। তখন টনিক তার চাচাত ভাইকে বলেন ‘তুই কী করিস?’ টাবু তখন তার হাতে থাকা দা দিয়ে ভাইকে কোপ মারে। আগে থেকেই খুলে রাখা দরজা দিয়ে সবাই দৌড়ে পালায়। আহত টনিক চোরদের পেছন পেছন কিছু দূর দৌড়ে গিয়ে পড়ে যান।

[১৩] অবশেষে আসামিদের কাছ থেকে প্রাপ্ত তথ্য অনুযায়ী, টাবুর খাটের নিচ থেকে খুনে ব্যবহৃত দা উদ্ধার করা হয়। ঘটনার তদন্ত শেষে আদালতে জড়িতদের বিরুদ্ধে খুনসহ ডাকাতির অভিযোগ আনে পিবিআই কর্মকর্তা।

 

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